पंजाब: BBMB के भर्ती के नियमों में बदलाव का गरमाया मुद्दा, उग्र आंदोलन कर सकते हैं किसान
पंजाब में भाखड़ा-ब्यास प्रबंधन बोर्ड के भर्ती नियमों में बदलाव के मुद्दे पर सियासत गरमाई हुई है।
चंडीगढ़, 04 मार्च 2022। पंजाब में भाखड़ा-ब्यास प्रबंधन बोर्ड के भर्ती नियमों में बदलाव के मुद्दे पर सियासत गरमाई हुई है। बीबीएमबी के नियमों में पिछले हफ्ते हुए बदलाव के बाद से ही किसान संगठन और राजनीतिक दल लगातार विरोध कर रहे हैं। यहां तक के किसान संगठनों ने भाखड़ा-ब्यास प्रबंधन बोर्ड के ख़िलाफ़ आंदोलन की चेतावनी भी दे दी है। बीबीएमबी के नियमों में क्या बदलाव हुए हैं किस लिए राजनीतिक दल और किसान संगठन विरोध कर रहे हैं। इसके बार में हम आपको विस्तार से जानकारी देने जा रहे हैं।

पानी और बिजली की आपूर्ति करता है BBMB
पंजाब के पुनर्गठन और हरियाणा राज्य के निर्माण के बाद 1 नवम्बर, 1966 को पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 की धारा 79 के तहत बीबीएमबी का गठन किया गया था । जिसके बाद भाखड़ा नंगल परियोजना का प्रशासन, रखरखाव और संचालन की ज़िम्मेदारी भाखड़ा प्रबंधन को दी गई था। भाखड़ा नंगल परियोजना 1 अक्तूबर, 1967 को भाखड़ा प्रबंधन को सौंप दी गई। 15 मई, 1976 को ब्यास परियोजना कार्य पूरा होने के बाद भाखड़ा प्रबंधन बोर्ड का नाम बदलकर भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) कर दिया गया। उसके बाद से ही पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल, दिल्ली और चंडीगढ़ बीबीएमबी की तरफ़ से पानी और बिजली की आपूर्ति की जाती रही है।

भारत सरकार ने जारी की संशोधन की अधिसूचना
भाखड़ा-ब्यास प्रबंधन बोर्ड प्रबंधन में एक अध्यक्ष और 2 पूर्णकालिक सदस्य पंजाब और हरियाणा से हैं। पंजाब और हरियाणा से सदस्यों को विद्युत और सिंचाई के तौर पर नामित किया गया है। वहीं हिमाचल प्रदेश और राजस्थान समेत प्रबंधन से जुड़े संबंधित राज्य सरकार के नामित सदस्य अपने प्रदेशा का प्रतिनिधित्व करते हैं। भाखड़ा-ब्यास प्रबंधन बोर्ड प्रबंधन में कुल कर्मचारियों की तादाद 12 हज़ार है, जिसमें 696 कर्मचारी ए ग्रेड के अधिकारी हैं और सहयोगी राज्यों से ताल्लुक रखते हैं। 23 फरवरी, 2022 को भारत सरकार ने बीबीएमबी नियम 1974 में संशोधन के लिए एक अधिसूचना जारी की। इस अधिसूचना के तहत प्रबंधन बोर्ड के परमानेंट सदस्यों के चयन के नियमों में बदलाव किया गया है।

किसान संगठनों ने दी उग्र आंदोलन की चेतावनी
नए नियम के मुताबिक पूरे भारत से परमानेंट सदस्यों की नियुक्ति की जा सकती है। पहले सिर्फ़ पंजाब और हरियाणा समेत सहयोगी राज्यों से ताल्लुक रखने वाले सदस्यों की ही बीबीएमबी में नियुक्ति की जाती थी। पंजाब के राजनीतिक दल, किसान संगठन और इंजीनियर समुदाय नए नियमों का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि नियमों बदलाव सिर्फ़ इसलिए किया गया है ताकि बाहरी लोगों को बीबीएमबी में नियुक्त किया जा सके। किसान संगठनों का आरोप है कि बीबीएमबी ने इन बदलावों के जरिए पंजाब और हरियाणा की स्थाई सदस्यता को खत्म कर दिया है। हालांकि बीबीएमबी की सफाई दी गई है कि इस तरह कोई भी क़दम नहीं उठाया जा रहा है। वहीं किसान संगठनों का कहना है कि केंद्र सरकार ने उनकी मांगे नहीं मानी तो वह दिल्ली की तरह उग्र आंदोलन करेंगे और इसकी पूरी जवाबदेही केंद्र की भाजपा सरकारी की होगी।
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