चंडीगढ़ के नतीजों को पंजाब में बदलाव की आहट ना समझें केजरीवाल, देख लें ये पुराना रिकॉर्ड
नई दिल्ली, 28 दिसंबर: चंडीगढ़ नगर निगम चुनावों के नतीजे सोमवार को आ गए हैं। ये नतीजे कई मायनो में खास हैं। सबसे बड़ी बात ये है कि पहली बार इस चुनाव में उतरी आम आदमी पार्टी शानदार प्रदर्शन करते हुए सबसे बड़ा दल बनकर उभरी है। जिसके बाद आप नेता काफी उत्साहित हैं और इसे पंजाब के विधानसभा चुनाव से जोड़ रहे हैं। वहीं कई विशेषज्ञ भी इसको पंजाब विधानसभा का सेमीफाइनल कह रहे हैं लेकिन इन नतीजों को पंजाब विधानसभा से नहीं जोड़ा जा सकता है और इसकी कई पुख्ता वजह हैं।

'आप' के लिए जीत वाकई खास
आम आदमी पार्टी के लिए इस जीत को छोटा नहीं कहा जा सकता है। आप का ये चंडीगढ़ में पहला चुनाव था। जिसमें कुल 35 वार्डों में से 14 पर उसने जीत हासिल की ह। वहीं बीजेपी को 12 वार्ड तो कांग्रेस को 8 वार्ड पर जीत मिली है। 2016 में बीजेपी ने एकतरफा जीत हासिल की थी। ऐसे में आप का ये प्रदर्शन जबरदस्त है। आप उम्मीदवार ने बीजेपी के मौजूदा मेयर रविकांत शर्मा और पूर्व मेयर दवेश मौदगिल को भी हराया है। ऐसे में साफ है कि आप ने दम तो दिखाया है।

क्या कह रहे हैं आप के नेता
चंडीगढ़ के नतीजों को लेकर आम आदमी पार्टी काफी उत्साह में दिख रही है। आप के सर्वेसर्वा और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने चंडीगढ़ निगम चुनाव में आप की इस जीत को पंजाब में बदलाव का संकेत कहा है। मनीष सिसोदिया और दूसरे नेताओं ने भी इसको पंजाब के विधानसभा चुनाव से जोड़ा है। सवाल ये है कि क्या ये नतीजे वाकई पंजाब विधानसभा की ओर इशारा करते हैं।

चंडीगढ़ के नतीजों का नहीं दिखता पंजाब में असर
चंडीगढ़ में नगर निगम में जो नतीजे आए हैं, उनको आधार बनाकर पंजाब विधानसभा चुनाव के बारे में भविष्यवाणी करना बिल्कुल सुरक्षित नहीं होगा। इसके लिए हमें सबसे पहले चुनाव के पुराने रिकॉर्ड को पलट लेना चाहिए जो कहता है कि चडीगढ़ और पंजाब में चुनाव का मिजाज अलग रहा है। 2016 के नगर निगम में बीजेपी ने चंडीगढ़ में एकतरफा जीत हासिल की थी। वहीं कुछ महीने बाद पंजाब में हुए विधानसभा चुनाव में उसका सूपड़ा साफ हो गया था। इसी तरह से 2011 में चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव में कांग्रेस जीती थी लेकिन जब कुछ ही महीने बाद पंजाब में विधानसभा चुनाव हुए तो वहां अकाली दल और भाजपा सत्ता में आ गए। ये बचाता है कि चंडीगढ़ और पंजाब में चुनाव को लेकर लोग एक जैसा नहीं सोचते हैं।
इसके अलावा लोकसभा चुनाव को देखें तो 2014 और 2019 दोनों बार चंडीगढ़ से बीजेपी की किरण खेर ने चुनाव जीता है। वहीं पंजाब में भाजपा का प्रभाव उस तरह का नहीं दिखा। 2019 में तो पंजाब उन प्रदेशों में था, जहां कांग्रेस ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया। साफ है कि चंडीगढ़ और पंजाब के लोगों ने लोकसभा में भी अलग समझ से वोटिंग की। ऐसे में अगर अगर आम आदमी पार्टी या कोई सियासी जानकार ये कहता है कि पंजाब में इसलिए जीत मिलेगी क्योंकि चंडीगढ़ में मिली है, तो ये यकीनी तौर पर जल्दीबाजी होगी।












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