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पंजाब के चुनावी भंवर में फंसी भाजपा, क्या कैप्टन लगाएंगे नैय्या पार, पढ़िए इनसाइड स्टोरी

भारतीय जनता पार्टी पंजाब के अलावा सभी राज्यों में चुनावी अभियान जोरों से कर रही है। लेकिन पंजाब में भारतीय जनता पार्टी अपनी चुनावी रणनीति तय करने में विफल साबित हो रही है।

चंडीगढ़, 15 नवम्बर, 2021। भारतीय जनता पार्टी पंजाब के अलावा सभी राज्यों में चुनावी अभियान जोरों से कर रही है। लेकिन पंजाब में भारतीय जनता पार्टी अपनी चुनावी रणनीति तय करने में विफल साबित हो रही है। भाजपा आलाकमान भी पंजाब में सियासी ज़मीन मजबूत करने के लिए कोई खास कदम उठाते हुए नहीं दिख रहा है। भारतीय जनता पार्टी दूसरे राज्यों में तो सरकार बनाने का दावा करते हुए नज़र आ रही है, लेकिन पंजाब में शिरोमणि अकाली दल से गठबंधन टूटने के बाद भारतीय जनता पार्टी की पकड़ धीरे-धीरे कमज़ोर ही होती जा रही है। भारतीय जनता पार्टी इससे पहले पंजाब के चुनावों में शिरोमणि अकाली दल के साथ मिलकर ही चुनाव लड़ा जिसमें अकाली दल की भूमिका अहम रहती थी।

चुनावी रण में भाजपा

चुनावी रण में भाजपा

शिरोमणि अकाली दल के साथ गठबंधन की वजह से कभी भी भारतीय जनता पार्टी को पूरे पंजाब में अकेले चुनाव लडने का मौक़ा नहीं मिला। भाजपा इस बार शिरोमणि अकाली दल के साथ गठबंधन में नहीं है इसलिए भाजपा अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी तो कर रही है, लेकिन कांग्रेस, अकाली दल और आम आदमी पार्टी के त्रिकोणीय मुकाबले में अभी भी भाजपा खुद के के लिए कोई जगह नहीं बन पा रही है। सियासी गलियारों में यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि पंजाब में भाजपा सियासी पकड़ बनाने में कामयाब नहीं हो पाएगी। पार्टी आलाकमान के पास यह रिपोर्ट भी जा चुकी है।

मज़बूत सहयोगी की तलाश में BJP

मज़बूत सहयोगी की तलाश में BJP

शिरोमणि अकाली दल से गठबंधन टूटने के बाद से भारतीय जनता पार्टी पंजाब में एक मज़बूत सहयोगी की तलाश में लगी हुई थी। पंजाब कांग्रेस में मचे सियासी घमासान ने भारतीय जनता पार्टी को सुनबरा अवसर दे दिया। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कांग्रेस से इस्तीफ़ा देकर अपनी नई पार्टी बना ली। इसके साथ ही उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के साथ गठबंधन की संभावना वाला बयान देकर भाजपा के लिए उन्होंने दही में जोड़न वाला काम भी कर दिया। इसके बाद से ही भारतयी जनता पार्टी के ज़्यादातर नेताओं ने कैप्टन अमरिंदर सिंह को राष्ट्रवादी करार देते हुए पंजाब कांग्रेस पर निशाना साधना शुरू कर दिया। हालांकि कैप्टन अमरिंदर सिंह औऱ भाजपा की तरफ़ सकरात्मक संकेत मिलने के बावजूद अभी तक गंठबंधन की घोषणा नहीं हुई है।

कैप्टन तैयार कर रहे रणनीति

कैप्टन तैयार कर रहे रणनीति

कैप्टन अमरिंदर सिंह को अभी अपनी नई पार्टी के लिए कई बातें तय करनी हैं। अपनी पार्टी का एजेंडा और अपना लक्ष्य भी निर्धारित करना है। उन्होंने यह भी कहा कि जहां तक गठबंधन की बात है समय आने पर इस संबंध में अंतिम फैसला लिया जाएगा। हालांकि पार्टी के सूत्रों की मानें तो किसान आंदोलन को लेकर भारतीय जनता पार्टी और अमरिंदर के विचार अलग-अलग है और इसे लेकर सहमति के कोई फॉर्मूले बनाने अभी बाकी है। कृषि कानूनों को लेकर भारतीय जनता पार्टी इतनी आगे बढ़ चुकी है कि अब भाजपा का वापस लौटना आसान नहीं है। जबकि दूसरी तरफ कांग्रेस से अलग हटकर अपनी पार्टी बनाने वाले अमरिंदर सिंह राष्ट्रवादी छवि के साथ-साथ किसान हितैषी नेता का तमगा लेकर ही चुनाव मैदान में उतरना चाहते हैं। कैप्टन चाहते हैं कि किसान आंदोलन का हल निकाल कर चुनावी मैदान में वह उतरें, ताकि उन्हें और उनकी पार्टी को काफ़ी फायदा मिलेगा।


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