अमृतसर में अकाली दल के पार्षद हरजिंदर सिंह बहमन की हत्या, परिवार ने बताया 'ड्रग माफिया कनेक्शन'
Akali Dal Councillor Harjinder Singh Bahman Murder: अमृतसर की सड़कों पर एक बार फिर गोलियों की गूंज ने पंजाब की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। रविवार को शिरोमणि अकाली दल के पार्षद हरजिंदर सिंह बहमन की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई। हमला तब हुआ जब वो गुरुद्वारे से बाहर निकले और तीन बाइक सवार बदमाशों ने ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी।
हरजिंदर सिंह के परिवार का कहना है कि यह महज हत्या नहीं, बल्कि एक पूर्व नियोजित हमला था, जिसकी पटकथा पहले ही लिखी जा चुकी थी। परिवार के मुताबिक, हरजिंदर सिंह को पहले भी धमकियां मिल चुकी थीं और उनके घर पर गोलियां चल चुकी थीं, लेकिन पुलिस ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। परिजनों ने यह भी दावा किया है कि हत्या ड्रग माफिया के इशारे पर कराई गई, क्योंकि हरजिंदर सिंह नशे के खिलाफ खुलकर बोलते थे।

क्या है CCTV फुटेज में?
बिक्रम सिंह मजीठिया ने कुछ दिन पहले का एक CCTV वीडियो शेयर किया, जिसमें दो नकाबपोश युवक रात 1 बजे हरजिंदर सिंह के घर पर फायरिंग करते नजर आते हैं। एक की बंदूक पहले जाम होती है, लेकिन दूसरा दो राउंड फायर करता है और फिर दोनों फरार हो जाते हैं। इसके बावजूद कोई गिरफ्तारी नहीं होती।
👉ਪੰਜਾਬ ਦੀ ਅਮਨ ਕਾਨੂੰਨ ਦੀ ਸਥਿਤੀ ਬਦ ਤੋਂ ਬਦਤਰ ਜ਼ਿਲ੍ਹਾ ਸ੍ਰੀ ਅੰਮ੍ਰਿਤਸਰ ਸਾਹਿਬ ਦੇ ਜੰਡਿਆਲਾ ਗੁਰੂ ਤੋਂ ਸ਼੍ਰੋਮਣੀ ਅਕਾਲੀ ਦਲ ਦੇ ਮੌਜੂਦਾ ਕੌਂਸਲਰ ਹਰਜਿੰਦਰ ਸਿੰਘ ਦਾ ਅੱਜ ਗੋਲੀਆਂ ਮਾਰ ਕੇ ਕਤਲ ਕਰ ਦਿੱਤਾ ਗਿਆ ਹੈ।
— Bikram Singh Majithia (@bsmajithia) May 25, 2025
👉 ਕੁਝ ਦਿਨ ਪਹਿਲਾਂ ਕੌਂਸਲਰ ਹਰਜਿੰਦਰ ਸਿੰਘ ਦੇ ਘਰ 'ਤੇ ਗੋਲੀਆਂ ਚੱਲੀਆਂ ਸਨ।
👉 ਲਗਾਤਾਰ ਕੌਂਸਲਰ ਨੂੰ ਧਮਕੀਆਂ ਮਿਲ… pic.twitter.com/vmI6oAHpaM
राजनीतिक आक्रोश और सवाल
मजीठिया ने भगवंत मान सरकार पर सीधा हमला करते हुए कहा कि जब एक निर्वाचित पार्षद सुरक्षित नहीं है, तो आम आदमी क्या उम्मीद करे? उन्होंने पूछा कि जब शिकायत और सबूत दोनों थे, तो FIR दर्ज करने और सुरक्षा देने में देरी क्यों हुई?
पुलिस की प्रतिक्रिया और जांच
ADCP हरपाल सिंह रंधावा ने बताया कि मामला गंभीर है और फोरेंसिक टीमें, CCTV फुटेज और स्थानीय गवाहों के आधार पर जांच तेज़ी से की जा रही है। अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है, लेकिन पुलिस का कहना है कि कुछ संदिग्धों को ट्रेस किया जा चुका है और जल्द ही गिरफ्तारी संभव है।
हरजिंदर सिंह बहमन की हत्या ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि पंजाब में सियासी और नशे के गठजोड़ की वजह से जान को खतरा सिर्फ आम नागरिक को नहीं, बल्कि जनप्रतिनिधियों को भी है। अब सवाल ये है कि क्या पुलिस और प्रशासन समय रहते इस नेटवर्क को तोड़ पाएंगे, या ये एक और 'फाइल बंद' केस बन जाएगा?












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