Punjab Police: वो 19 डॉक्‍टर, जो बन गए IPS अफसर, जानें स्टेथोस्कोप छोड़ क्‍यों चुनी खाकी वर्दी?

Doctor IPS in Punjab Police: इन्‍होंने डॉक्‍टरी की पढ़ाई की। सफेद कोट की वर्दी पहनने वाले थे। गले में स्टेथोस्कोप टांगने वाले थे, मगर कंधे पर सितारे, माथे पर अशोक स्‍तम्‍भ और खाकी वर्दी की चाह इन्‍हें सिविल सेवा में ले आई। ये हैं पंजाब पुलिस में वो डॉक्‍टर, जो आईपीएस बन गए।

पंजाब में डॉक्‍टर बनने के बाद संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा पास भारतीय पुलिस सेवा (IPS) ज्‍वाइन करने का सिलसिला साल 1992 में शुरू हुआ था, जो आज भी जारी है। अब पंजाब पुलिस 19 आईपीएस अधिकारी मेडिकल बैकग्राउंड वाले हो गए हैं।

Dr IPS in Punjab Police

पंजाब में डॉक्‍टरी छोड़ पुलिस सेवा में आने वाले पहले MBBS शख्‍स डॉ. शरद सत्या चौहान थे। इन्‍होंने साल 1992 बैच के आईपीएस के रूप में पंजाब पुलिस ज्‍वाइन की। इनके बाद साल दर साल डॉक्‍टरी छोड़ आईपीएस बनने वालों की संख्‍या बढ़ती ही चली गई।

द इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार पंजाब राज्‍य कैडर के 144 आईपीएस अधिकारियों 19 मेडिकल पृष्ठभूमि से हैं। इनमें एमबीबीएस, बीडीएस और होम्योपैथी डिग्री से लेकर आयुर्वेद और पशु चिकित्सा विज्ञान तक शामिल है। इनमें से चार आईपीएस तो वरिष्‍ठ पुलिस अधीक्षक पद पर सेवाएं दे रहे हैं। एक डीजीपी रैंक के अधिकारी हैं।

पंजाब पुलिस में मेडिकल पृष्ठभूमि वाले जो 19 आईपीएस हैं, उनमें 11 एमबीबीएस डॉक्टर, 3 बीडीएस डॉक्टर और एक-एक होम्योपैथिक चिकित्सा और सर्जरी, आयुर्वेदिक चिकित्सा और सर्जरी में स्नातक और इतने ही पशु चिकित्सा अधिकारी हैं।

 Punjab Police IPS officer

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पंजाब के बाहर भी डॉक्‍टर से आईपीएस

पंजाब कैडर में चार महिलाएं भी डॉक्‍टरी छोड़ आईपीएस बनी हैं। इनमें 2019 बैच की आईपीएस डॉ. ज्योति यादव भी शामिल हैं, जो पंजाब के कैबिनेट मंत्री हरजोत सिंह बैंस की पत्नी हैं। वह मोहाली में पुलिस अधीक्षक (जांच) के पद पर तैनात हैं। वहीं, पंजाब की बेटी डॉ. नवजोत सिमी बिहार कैडर में आईपीएस हैं।

मीडिया से बातचीत में डॉ. शरद सत्या चौहान कहते हैं कि उन्‍होंने साल 1992 में दिल्ली यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस की डिग्री पूरी की और इंटर्नशिप के दौरान यूपीएससी की परीक्षा भी पास कर ली। खास बात है कि डॉक्‍टर चौहान उस साल अपने एमबीबीएस और आईपीएस बैच दोनों में टॉपर रहे।

चौहान की मानें तो मेडिकल बैकग्राउंड होना पुलिसिंग में बहुत मददगार साबित होता है। यह फोरेंसिक और सामुदायिक पुलिसिंग जैसे क्षेत्रों में बहुत काम आता है। उदाहरण के लिए कोविड-19 प्रबंधन के दौरान उनकी मेडिकल पृष्ठभूमि कानून लागू करने में काफी मददगार साबित हुई।

 Punjab Police iPS officer

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पंजाब में डॉक्‍टर से आईपीएस बनने वाले

1. डॉ. शरद सत्या चौहान (1992-बैच) - विशेष पुलिस महानिदेशक (पंजाब पुलिस हाउसिंग कॉर्पोरेशन)
2. डॉ. सुखचैन सिंह गिल (2003-बैच) - आईजी मुख्यालय
3. डॉ. कौस्तभ शर्मा (2001-बैच) - - आईजी मानवाधिकार (उन्होंने एमडी मेडिसिन किया)
4. डॉ. एस बूपति (2007-बैच) - डीआइजी जालंधर रेंज
5. डॉ. नानक सिंह (2011-बैच) - मनसा एसएसपी
6. डॉ. संदीप कुमार गर्ग (2012-बैच)-मोहाली एसएसपी
7. डॉ. अखिल चौधरी (2012-बैच)- एसबीएस नगर (नवांशहर) एसएसपी
8. डॉ. अंकुर गुप्ता (2016-बैच) - डीसीपी जालंधर
9. डॉ. सिमरत कौर (2016-बैच) - एआईजी (काउंटर इंटेलिजेंस) पटियाला
10. डॉ मेहताब सिंह (2017-बैच)-एडीसीपी-I लुधियाना
11. डॉ. दर्पण अहलूवालिया (2020-बैच) - एडीसीपी-I अमृतसर
12. डॉ. सचिन गुप्ता (2014-बैच)- एआईजी प्रोविजनिंग बीडीएस
13. डॉ रवजोत ग्रेवाल (2015-बैच) - फतेहगढ़ साहिब एसएसपी
14. डॉ. ज्योति यादव (2019-बैच)-मोहाली एसपी (जांच)
15. डॉ. नरेश कुमार अरोड़ा (1994-बैच) - एडीजीपी मानवाधिकार
16. डॉ. राहुल एस (2008-बैच) - डीआइजी-सह-निदेशक सतर्कता
17. विनीत अहलावत (2021-बैच) - भारतीय विदेश सेवा की तैयारी (छुट्टी पर)
18. डॉ. पाटिल केतन बलिराम (2010-बैच) - 27 दिसंबर, 2022 से केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर
19. डॉ. प्रज्ञा जैन (2017-बैच) - एडीसीपी-III अमृतसर

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