पुलवामा हमलाः शहीद की गर्भवती पत्नी बोली, कहा था श्रीनगर पहुंचकर कॉल करता हूं फिर 4 बजे फोन की घंटी बजी और...
Pulwama Attack:गर्भवती पत्नी ने बताया क्या थे शहीद पति के आखिरी शब्द...
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नई दिल्ली। जम्मू कश्मीर के पुलवामा आतंकी हमले में 45 सीआरपीएफ के जवान शहीद हो गए। देश ने अपने वीर सपूतों को खो दिया। इस घटना से पूरा देश गम में डूब गया है। सबकी आंखें नम है। देश के वीर जवानों ने देश के लिए अपनी अपनी जान गंवा दी, लेकिन अब उनके पीछे उनका पूरा परिवार सुन्न हो गया। पुलवामा में हुए आतंकी हमले ने किसी से उसका बेटा, किसी से उसका पति, किसी से भाई तो किसी से पिता का साया छिन लिया। बिहार के भागलपुर में शहीद रतन ठाकुर की गर्भवती पत्नी राजनंदिनी अपना सुध खो चुकी है। उन्हें मलाल है कि वह उनसे जी भरकर बात भी नहीं कर सकी थीं। एक पिता अपने अजन्मे बच्चे का मुंह तक नहीं देख पाया। वहीं उस बच्चे के दुनिया में आने से पहले ही उसपर से पिता का साया छिन गया।

गर्भवती पत्नी को इस बात का मलाल
पुलवामा हमले में शहीद हुए रतन ठाकुर का परिवार बिहार के भागलपुर के लोदीपुर मुहल्ले में रहता है। मूलरूप से वो कहलगांव के रहने वाले हैं, लेकिन बच्चों की पढ़ाई के चलते भागलपुर में रह रहे हैं। गुरुवार शाम जैसी ही टीवी पर आतंकी हमले की खबर आई रतन ठाकुर के घर लोगों का तांता लग गया। लोग परिवार को ढांढस बंधाने की कोशिश कर रहे हैं। बुजुर्ग पिता बेसुध हो गए हैं। 6 माह की गर्भवती पत्नी राजनंदिनी देवी को इस बात का मलाल है कि वह उनसे जी भरकर बात भी नहीं कर सकी थीं और पति देश के लिए शहीद हो गए। राजनंदिनी के आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहा है। रोते-रोते उनका बुरा हाल है। शहीद रतन ठाकुर का एक 4 साल का बेटा भी है जिन्हें पता नहीं है कि उनके पिता अब ड्यूटी से फिर कभी लौटकर नहीं आएंगे। राजनंदिनी ने बताया कि जब वह बस से श्रीनगर जा रहे थे, उन्होंने फोनकर बात की थी, लेकिन रास्ते में नेटवर्क के कारण पूरी बात नहीं हो पा रही थी। उन्होंने कहा था कि वो श्रीनगर पहुंचकर बात करेंगे, लेकिन जब 4 बजे घर के फोन की घंटी बजी तो उनपर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। राजनंदिनी को मलाल रह गया कि वह आने वाले बच्चे का मुंह भी नहीं देख सके। रोते-बिलखते वह कहती हैं कि आखिर हमलोगों से क्या गलती हो गई।

दूसरे बेटे को भी मातृभूमि को सौंपने को तैयार
शहीद रतन ठाकुर के पिता बेटे की तस्वीर हाथों में लिए बेसुध घर के एक कोने से दूसरे कोने में टहल रहे हैं। उन्हें विश्वास नहीं हो रहा है कि उनका रत्न अब नहीं रहा। आतंकियों ने उनके रतन को भी छीन लिया। बेटे की तस्वीर को हाथों में थामे पिता रामनिरंजन ठाकुर कहते हैं कि जब पिछले साल 2018 में रतन घर आया था तो सबके साथ फोटो बनवाई थी। कहा था बहन की शादी सरकारी नौकरी वाले लड़के से करूंगा, लेकिन अब कौन देखेगा हमें। वो कहते हैं कि एक ही होनहार सपूत था मेरा, वह भी भारत माता की रक्षा में शहीद हो गया। अब किसके सहारे जीएंगे। भगवान आतंकियों को माफ नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि वो अपना दूसरा बेटा भी मातृभूमि के लिए सौंप देंगे, लेकिन पाकिस्तान से बदला लिया जाना चाहिए। शहीद रतन ठाकुर के 4 साल के बेटे कृष्णा को पता नहीं कि उसके पिता शहीद हो गए हैं। कोई पूछे तो कहता है पापा ड्यूटी पर गए हैं।

बिहार ने खोए ये दो सपूत
रतन के अलावा बिहार ने एक सपूत को खो दिया। पुलवामा हमले में बिहार के रतन ठाकुर के अलावा पटना के मसौढ़ी के तारेगना गांव निवासी संजय कुमार सिन्हा के शहीद हो गए। 8 जनवरी को ही सीआरपीएफ 176वीं बटालियन के जवान संजय कुमार तारेगना से छुट्टी बिताकर वापस ड्यूटी के लिए लौटे थे। महेंद्र प्रसाद के बेटे संजय के परिवार में पत्नी बबीता देवी उनकी दो बेटियां रूबी कुमारी और टुन्नी कुमारी के अलावा बेटा सोनू कुमार है।शहीद जवान संजय कुमार के परिजनों के मुताबिक गुरुवार की शाम चार बजे संजय के बहनोई और नालंदा जिले के परवलपुर के रहनेवाले जितेंद्र के मोबाइल पर सीआरपीएफ के अफसरों ने फ़ोन कर घटना की जानकारी दी। जिसके बाद पूरा परिवार गम में डूब गया।












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