प्रतापगढ़ में Cyber Fraud गैंग गिरफ्तार, गेमिंग और लोन एप के जरिए 20 करोड़ की ठगी, 16 राज्यों में नेटवर्क

Cyber Fraud: प्रतापगढ़ जिले में ऑनलाइन ठगी के एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ हुआ है। पुलिस ने शुक्रवार को तीन साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है, जो देशभर में लोन ऐप, गेमिंग और फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के जरिए करोड़ों की ठगी कर रहे थे।

गिरफ्तार किए गए आरोपियों में मास्टरमाइंड भी शामिल है। इन पर अब तक 20 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी का आरोप है। पुलिस ने इनके पास से मोबाइल फोन, एटीएम कार्ड, फर्जी दस्तावेज और QR कोड बरामद किए हैं।

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यह कार्रवाई तब शुरू हुई जब जेठवारा के एक गरीब युवक ने शिकायत दर्ज कराई कि उसे लोन का लालच देकर किसी ने उसका बैंक खाता खुलवाया। बाद में न तो लोन मिला, उल्टा धमकियां मिलने लगीं। मामला संदिग्ध लगा तो साइबर सेल को जांच सौंपी गई।

बैंक खातों में हुआ करोड़ों का लेनदेन

जांच में पता चला कि शिकायतकर्ता के खाते से लाखों रुपये का लेनदेन हो चुका था। इस पर पुलिस की टीम ने सर्विलांस सेल को भी जोड़ा। जब इन खातों को गहराई से खंगाला गया तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।

पुलिस को ऐसे कई बैंक खाते मिले जिनका इस्तेमाल देशभर में ठगे गए पैसों को इधर-उधर करने में हो रहा था। ये खाते गरीब और बेरोजगार लोगों के नाम पर खोले गए थे, जिन्हें मामूली लालच देकर फंसाया गया था।

16 राज्यों में फैला था गिरोह का नेटवर्क

जांच में खुलासा हुआ कि यह साइबर गैंग केवल यूपी तक सीमित नहीं था। इसके तार महाराष्ट्र, गुजरात, दिल्ली, तेलंगाना, तमिलनाडु, ओडिशा और केरल सहित 16 राज्यों में फैले हुए थे।

राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल से प्राप्त जानकारी में सामने आया कि इस गिरोह के खिलाफ देश के अलग-अलग हिस्सों में 55 से अधिक मामले दर्ज हैं। यह नेटवर्क काफी लंबे समय से सक्रिय था।

मास्टरमाइंड समेत तीन आरोपी पुलिस की गिरफ्त में

एसपी डॉ. अनिल कुमार ने प्रेस वार्ता में बताया कि गिरोह का सरगना अंकित पाल भंगवा चुंगी का निवासी है। उसके साथियों में शिवम तिवारी (सगरा पूरे ओझा) और अनुराग शुक्ल (दहिलामऊ) का नाम शामिल है।

गिरफ्तार आरोपियों के पास से कई मोबाइल, फर्जी आधार कार्ड, एटीएम और दस्तावेज बरामद हुए हैं। पुलिस अब इस नेटवर्क के अन्य 10 सदस्यों की तलाश में जुट गई है। जांच को और तेज कर दिया गया है।

लोन ऐप के जाल में फंसा रहे थे आम जनता

गिरोह का तरीका बेहद शातिराना था। ये आरोपी सोशल मीडिया और नकली लोन ऐप्स के जरिए लोगों को आसान कर्ज का झांसा देते थे। एक बार खाता खुलवा लेने के बाद, वे उसी खाते का इस्तेमाल पैसों के लेनदेन में करते थे।

जिन लोगों के नाम पर खाते खुलते थे, उन्हें अक्सर इसकी भनक तक नहीं होती थी कि उनके नाम पर करोड़ों रुपये की हेराफेरी हो रही है। पीड़ित अक्सर मामले को समझ ही नहीं पाते और समय रहते शिकायत नहीं कर पाते थे।

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