UP के इस जिले में बना 'कोरोना माता' का मंदिर, दीवारों पर लिखे गए ये निर्देश

प्रतापगढ़, जून 12: 'कोरोना माता' का मंदिर...सुनने में थोड़ा अजीब तो जरुर लगता है, लेकिन यह सत्य है। आपको बता दें कि यह पहला और अनूठा मंदिर है, जो उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में स्थापित हुआ है। हैरानी तो इस बात की है कि कोरोना माता के मंदिर में ग्रामीण दर्शन-पूजन के लिए भी पहुंच रहे हैं। हालांकि मंदिर में प्रवेश के लिए बनाए गए नियम लोगों को संक्रमण के प्रति जागरूकता का संदेश दे रहे हैं।

‘Corona Mata temple comes up under a neem tree at a village in Pratapgarh

कोरोना माता का मंदिर प्रतापगढ़ जिले के संगीपुर के जूही शुकुलपुर गांव में नीम के पेड़ के नीचे एक प्रतिमा स्थापित की गई। दरअसल, सांगीपुर के पूरे जूही (शुकुलपुर) में महामारी से तीन मौतें हुईं तो लोग डर गए। गांव के लोकेश श्रीवास्तव की पहल के बाद ग्रामीणों ने 7 जून को कोरोना माता की मूर्ति स्थापित कराई। विशेष ऑर्डर पर तैयार कराई मूर्ति को गांव में नीम के पेड़ के पास स्थापित कर इसे कोरोना माता मंदिर का नाम दिया गया।

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    ग्रामीणों का मानना है कि, पूर्वजों ने चेचक को माता शीतला का स्वरूप माना था और अब कोरोना भी देवी माता का ही रूप है। ग्रामीण राधे वर्मा का दावा है कि कोरोना माता की पूजा करने से हमारे गांव में कोरोना का संक्रमण नहीं फैलेगा। कई लोग इसको अंधविश्वास मान रहे हैं, लेकिन कोरोना माता की मास्क लगी प्रतिमा ग्रामीणों को कोरोना के बचाव के लिए जागरूक भी कर रही है।

    मंदिर में लिखे गए ये निर्देश
    ग्रामीणों का दावा है कि, यह विश्व का पहला कोरोना माता का मंदिर है। मंदिर की दीवारों पर कुछ संदेश भी लिखे गए हैं। जिनमें कृपया दर्शन से पूर्व मास्क लगाएं, हाथ धोएं, दूर से दर्शन करें वरना...। इतना ही नहीं एक तरफ लिखा गया है कि कृपया सेल्फी लेते समय मूर्ति को न छुएं तो दूसरी तरफ कृपया पीले रंग का ही फूल, फल, वस्त्र, मिठाई, घंटा आदि चढ़ाएं। अब इसे अंधविश्वास कहें या लोगों की आस्था लेकिन मंदिर में बड़ी संख्या में लोग पूजा-अर्चना करने भी पहुंच रहे हैं।

    दुर्गा मंदिर बलीपुर के आचार्य यह कहते हैं
    दुर्गा मंदिर बलीपुर प्रतापगढ़ के महंत आचार्य आलोक मिश्र कहते हैं कि कोई आपदा आने पर देवी-देवता की शरण में लोग जाते ही हैं। इससे उनको आत्मिक शक्ति भी मिलती है। हर युग में महामारी आने पर पूजा व देवियों के प्रति आस्था का उल्लेख मिलता है। यह अनुचित नहीं है।

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