अब सोशल मीडिया से ऊबने लगे हैं भारत के लोग

नई दिल्ली, 26 जुलाई। फेसबुक और यूट्यूब के इस्तेमाल में भारतीय दुनिया में पहले नंबर पर हैं. यहां इंटरनेट तक पहुंच रखने वाले 86 फीसदी लोग यूट्यूब का इस्तेमाल करते हैं. जबकि 76 फीसदी फेसबुक और 75 फीसदी यूजर्स वॉट्सऐप चलाते हैं. लेकिन अब यहां लोगों का मन सोशल मीडिया से ऊब रहा है और वे इसे छोड़ने की कोशिश कर रहे हैं. भारत के कुल 75 करोड़ से ज्यादा एक्टिव इंटरनेट यूजर्स में से करीब 5 लाख लोग हर महीने सोशल मीडिया छोड़ना चाहते हैं.ऐसे लोगों के मामले में भारत दूसरे नंबर पर है. सिर्फ अमेरिका में भारत से ज्यादा लोग इन प्लेटफॉर्म को छोड़ना चाह रहे हैं.

Provided by Deutsche Welle

साल 2019 के बाद से फेसबुक यूजर्स के सटीक आंकड़े नहीं मौजूद हैं लेकिन कई मार्केटिंग वेबसाइट से पता चलता है कि भारत में इंटरनेट यूजर्स तेजी से बढ़ने के बावजूद फेसबुक यूजर्स की संख्या नहीं बढ़ी है. सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर साल 2019 में किए एक सर्वे में संस्था लोकनीति ने भी पाया कि 2018 से मई 2019 तक भारत में फेसबुक का इस्तेमाल करने वालों की संख्या नहीं बढ़ी थी. ट्विटर का हाल भी ऐसा ही था.

अब भी भारत में फेसबुक के 33 करोड़ यूजर्स ही है. जबकि 2018 में ही फेसबुक यह आंकड़ा पार कर गया था. इससे यह साफ है कि जहां अब भी इंटरनेट के साथ फेसबुक पहली बार पहुंच रहा है और लोग उससे जुड़ रहे हैं, शहरी इलाकों के लोग इससे दूरी बना रहे हैं. कई यूजर्स यह भी कहते हैं कि उन्होंने फेसबुक को डिलीट तो नहीं किया है लेकिन वे इसका इस्तेमाल बंद कर चुके हैं.

सोशल मीडिया की शुरुआत के समय इन्हें हाथों-हाथ लिया गया था. मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट हिमानी कुलकर्णी कहती हैं, "हम जैसा आनंद मैग्जीन, टीवी और म्यूजिक में पाते थे, सोशल मीडिया उसे और बढ़ा देने का जरिया था. फिर सबसे बड़ी बात इंसान हमेशा अपने लिए आसान तरीके चुनता है और सोशल मीडिया पर नई-नई जानकारियों और तस्वीरों के लिए उसे सिर्फ अंगूठा चलाना पड़ता था."

किन वजहों से सोशल मीडिया छोड़ रहे हैं लोग?

कई लोगों ने कहा कि शुरुआत में सोशल मीडिया उनके लिए एंटरटेनमेंट और दोस्तों से जुड़ने का एक माध्यम था. बाद में इसपर ऐसे लोग भी जुड़ते गए जिनसे या तो बहुत कम जान-पहचान थी या उनसे सीधे सामाजिक संबंध नहीं थे. ये लोग बताते हैं कि 10-12 साल पहले जब उन्होंने सोशल मीडिया का इस्तेमाल शुरु किया तब वे दोस्तों से बातचीत करना चाहते थे लेकिन अब वे सिर्फ अपने बारे में बातें कर रहे थे.

वे सभी को सिर्फ यह बताना चाहते थे कि 'वे कहां गए' और 'किस रेसतरां में क्या खाया.' हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की एक रिपोर्ट में भी इस बात का जिक्र है. इसके मुताबिक आम तौर पर लोगों की कुल बातों में से 30-40 फीसदी अपने बारे में होती हैं लेकिन सोशल मीडिया पर यह मात्रा 80-90 फीसदी तक पहुंच जाती है. हाल ही में फेसबुक छोड़ने वाली एक लड़की ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर बताया, "मैं लोगों को खुद से बेहतर जगहों पर घूमते देख और खुद से बेहतर नौकरियां करता देख उनसे नफरत करने लगी थी, फिर भी अपने को वापस फेसबुक इस्तेमाल करने और लोगों के पोस्ट पढ़ने से नहीं रोक पाती थी."

सोशल मीडिया छोड़ने वाले कई लोगों ने कहा कि जब वे किसी से बात करते हैं तो उन्हें उनकी जिंदगी के हर पहलू का पता चलता है लेकिन सोशल मीडिया पोस्ट पर उन्हें किसी के व्यक्तिगत जीवन, खूबसूरती, टैलेंट या फिटनेस के सिर्फ सबसे चमकीले पहलू का पता चलता है, जिसे देख कई लोग अपने लिए बुरा महसूस करने लगते हैं. कुछ लोगों ने यह भी कहा कि जिनसे हमारा रोज का संपर्क नहीं होता, उनसे जुड़ी जानकारियां हमारे लिए सोशल मीडिया फीड का कचरा बन जाती हैं.

काम के समय इस्तेमाल से प्रोडक्टिविटी में 40% गिरावट

कई बार लोग अपने सोशल मीडिया का इस्तेमाल सीधे संपर्क में रहे दोस्तों और रिश्तेदारों से जुड़ने के लिए करना चाहते हैं. ऐसे में उनके लिए तब असमंजस की स्थिति पैदा हो जाती है, जब कॉलेज के सहपाठी या ऑफिस के सहकर्मी उनसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जुड़ना चाहते हैं. ऐसा होने पर फेसबुक एक पर्सनल स्पेस नहीं रह जाता.

कई अन्य मामलों में यह भी पाया गया है कि जो सोशल मीडिया का अधिक इस्तेमाल कर रहे हैं, वे व्यक्तिगत संबंधों को ज्यादा समय नहीं दे पा रहे. सीधी मुलाकातें (खासकर कोरोना काल में) कम हो रही हैं और वर्चुअल दुनिया में डूबे कई लोग एक साथ, एक जगह जुटने का आनंद भी भूल चुके हैं. कई स्टडीज बता चुकी हैं कि युवा और बच्चे सोशल मीडिया पर साइबर बुलिंग का शिकार हो सकते हैं. और इसका अधिक इस्तेमाल लत भी बन सकता है. अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन की एक रिपोर्ट में बताया गया कि जब कोई इंसान फेसबुक चलाते हुए अन्य काम करता है तो उसकी प्रोडक्टिविटी 40% तक कम हो जाती है.

हिमानी कुलकर्णी कहती हैं, "भारत जैसे देशों में लोग खुलेआम अपने विचार, प्यार और उपलब्धियों का दिखावा नहीं कर पाते, ऐसे में उन्हें इसके लिए एक प्लेटफॉर्म मिल रहा है तो वे इसकी ओर बहुत आकर्षित रहते हैं. फिर चाहे काम ही क्यों न प्रभावित हो, वे इसका मोह नहीं छोड़ पाते."

सोशल मीडिया छोड़ पाने की तीन मुख्य वजहें

इतनी खामियों के बाद भी सोशल मीडिया छोड़ना सबके बस की बात नहीं. अमेरिका की कॉर्नेल यूनिवर्सिटी ने सोशल मीडिया को लेकर किए एक रिसर्च में सोशल मीडिया न छोड़ पाने की तीन वजहें बताईं - पहली, कई यूजर्स सोचते हैं कि यह एक आदत है और मानते हैं कि उन्हें अक्सर इसका इस्तेमाल करना चाहिए. दूसरी वजह यह कि दूसरों की रुचि के बारे में जानना हमें अच्छा लगता है. साथ ही हम उनकी रुचियों को अपने अनुसार ढालना भी चाहते हैं.

तीसरी वजह है उदासी का अहसास. जब भी हमें बुरा महसूस होता है, हम सोशल मीडिया की ओर बढ़ते हैं. इसके लिए नए वर्ककल्चर को भी जिम्मेदार बताने वाली हिमानी कुलकर्णी कहती हैं, "वर्तमान दौर में जब ब्रांडिंग बहुत मायने रखती हो तो लोगों को लगता रहेगा कि उन्हें इसका इस्तेमाल करना चाहिए. साथ ही जब नौकरियों में आपके सोशल मीडिया इंफ्लुएंस की मांग हो तो इसे छोड़ना और मुश्किल है." कोपेनहेगन स्थित हैप्पीनेस रिसर्च इंस्टीट्यूट के मुताबिक सिर्फ 7 दिनों के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल छोड़ने से लोगों की खुशी बढ़ी है और उनका गुस्सा और अकेलेपन की भावना में कमी आई है. वहीं साल 2019 में स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी और न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी में किए गए 'द वेलफेयर इफेक्ट्स ऑफ सोशल मीडिया' नाम के रिसर्च में पाया गया कि लोगों के फेसबुक छोड़ने के बाद उनके इंटरनेट पर गुजारे कुल समय में भी कमी आई. इतना ही नहीं फेसबुक छोड़ने के बाद लोगों के दिन में करीब एक घंटे का समय बच गया है.

कैसे छोड़ें सोशल मीडिया की लत?

जानकार बताते हैं कि स्क्रीन के पीछे मौजूद लोगों के मुकाबले आसपास मौजूद लोगों पर ज्यादा ध्यान देने की कोशिश करनी चाहिए. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जमकर नोटिफिकेशन का इस्तेमाल करते हैं ताकि लोग इनपर वापस लौटकर आएं. इन नोटिफिकेशन को ऑफ किया जा सकता है.

सोशल मीडिया इस्तेमाल के लिए अधितकम समय निर्धारित कर अलार्म लगा सकते हैं, जिससे ज्यादा यूज से खुद को रोक सकें. फिलहाल ऐसे कई ऐप भी आ गए हैं, जो निर्धारित समय से ज्यादा सोशल मीडिया यूज करने पर वॉर्निंग भेजते हैं. हालांकि हिमानी कुलकर्णी कहती हैं, "जब तक लोगों को इस्तेमाल में मजा आता रहेगा, उनके लिए इसे छोड़ना मुश्किल ही रहेगा. जब उन्हें इससे काफी परेशानी होने लगेगी, तभी वे इसे छोड़ पाएंगे." सोशल मीडिया के इस्तेमाल से जुड़ी अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन की एक रिपोर्ट में पाया गया कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल बंद करने के बाद लोगों का राजनीति के प्रति ध्यान कम हुआ और उनकी समाचारों की जानकारी कम हुई.

स्टडी में कहा गया कि भले ही फेसबुक छोड़ने से लोगों की जानकारी कम होती हो लेकिन इससे वे ध्रुवीकरण से भी दूर होते हैं. हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की नाइमन लैब वेबसाइट के मुताबिक भी जैसे-जैसे लोगों का रोजाना का सोशल मीडिया इस्तेमाल कम होता है, लोग स्वस्थ महसूस करने लगते हैं और जीवन से जुड़े सकारात्मक फैसले लेते हैं.

Source: DW

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