बिहार का तूफान- निकम्मापन मौसम विभाग का
नई दिल्ली(विवेक शुक्ला) हालांकि मौसम विभाग की भविष्यवाणी को लेकर लोग अब आश्वस्त रहने लगे हैं। उसकी तरफ से मौसम के मिज़ाज की सही तस्वीर पहले ही बता दी जाती है। पर क्यों मौसम विभाग बिहार में मंगलवार की देर रात उत्तर-पूर्व इलाके में आए तूफान को लेकर जानकारी नहीं दे पाया? मौसम वैज्ञानिकों को इस सवाल का जवाब देना होगा। क्या उसका काम सिर्फ महानगरों के मौसम के मिज़ाज को ही बताना है ? बिहार में जो कुछ हुआ उससे तो यही लगता है।

तूफान की वजह से काफी तबाही हुई है। 32 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है और 80 से अधिक घायल विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं। बड़े पैमाने पर घरों और संपत्ति को नुकसान पहुंचा है। सरकार की ओर से मृतकों के परिवार को 4-4 लाख रुपये मुआवजा दिए जाने की घोषणा की गई है।
कोसी के तूफान ने मचाई तबाही, 32 की मौत, लाखों का नुकसान
जानकारी के मुताबिक,तूफान का असर पूर्णिया, सहरसा, कटिहार, सुपौल, मधेपुरा, मधुबनी और दरभंगा समेत आसापास के कुछ जिलों में देखा गया। कोसी के इस इलाके में अक्सर तूफान आते हैं, लेकिन इस बार गति बहुत ज्यादा थी।
इसमें कोई शक नहीं है कि तूफान की पहले से सूचना मिल जाती तो इतनी तबाही नहीं होती। आपदा प्रबंधन विभाग पहले से तैयारी कर लेता। तूफान के कारण हजारों घर उजड़ गए हैं। सड़कों और बिजली के पोलों पर पेड़ गिर जाने से यातायात और बिजली व्यवस्था ठप पड़ गई है। जाहिर है, पुनर्वास के काम में काफी वक्त लगेगा। पर मौसम विभाग ने अगर अपनी जिम्मेदारी को निभाया होता तो तबाही कम हो जाती।












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