शेल्टर होम कांडः अब पटना के इस हॉस्टल में 'छात्राओं पर जबरदस्ती देह व्यापार करने का बनाया जाता था दबाव'

पटना। बिहार के मुजफ्फरपुर शेल्टर होम कांड के बाद एक बार फिर झकझोर देने वाला मामला सामने आया है, जहां नेत्रहीन छात्राओं पर देह व्यापार के लिए दबाव बनाया जा रहा था। इस मामले में राज्य मानवाधिकार आयोग ने जिलाधिकारी से शुरुआती जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की प्रगति रिपोर्ट मांगी है। मामले की सुनवाई आयोग के कार्यकारी अध्यक्ष उज्जवल कुमार दुबे के स्तर से की जा रही है।

 संस्था को हॉस्टल का दिया गया था जिम्मा

संस्था को हॉस्टल का दिया गया था जिम्मा

बता दें कि एक स्वयंसेवी संस्था नेशनल एसोसिएशन फॉर द ब्लाइंड प्रदेश की राजधानी पटना के अलग-अलग इलाकों में नेत्रहीन छात्राओं के लिए हॉस्टल चलाती है। इस संस्था को नेत्रहीन छात्राओं के हॉस्टल की देखरेख का जिम्मा दिया गया था। पटना विश्वविद्यालय के नेत्रहीन छात्रावास में रहने वाले दिव्यांग छात्र सर्वजीत भाटिया और दूसरे छात्रों ने मानवाधिकार आयोग से शिकायत की है।

छात्राओं को देह व्यापार के लिए बनाते थे दबाव

छात्राओं को देह व्यापार के लिए बनाते थे दबाव

स्थानीय थाने में शिकायत नहीं सुने जाने पर छात्रों ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और राज्य मानवाधिकार आयोग से अलग-अलग शिकायत की। छात्रों ने शिकायत में बताया है कि उन्हें विपरीत हालात में रहना पड़ रहा है। उन्होंने स्पष्ट रूप से आरोप लगाया है कि संस्था की संचालिक अनुदान के पैसे को अपने पास रखकर नेत्रहीन विद्यार्थियों का शारीरिक और मानसिक शोषण करती हैं और नेत्रहीन छात्राओं को देह व्यापार के लिए मजबूर किया जाता है।

जांच की जिम्मेदारी जिलाधिकारी को दी गई

जांच की जिम्मेदारी जिलाधिकारी को दी गई

इन नेत्रहीन छात्रों को स्वयंसेवी संस्था के तहत पटना में संचालित अलग-अलग नेत्रहीन छात्राओं के छात्रवासों की देखरेख का जिम्मा दिया गया था। राज्य सरकार की ओर से इसके लिए संस्था को भुगतान भी किया जाता है। शिकायत मिलने पर राज्य मानवाधिकार आयोग ने मामले की जांच की जिम्मेदारी पटना के जिलाधिकारी को दिया।

आरोपों की पुष्टि

आरोपों की पुष्टि

इसके बाद जिला सामाजिक कोषांग पटना के सदर की कार्यपालक दंडाधिकारी नीलू पॉल ने जांच करने के बाद छात्रों द्वारा लगाए गए आरोपों की पृष्टि की। नीलू पॉल की रिपोर्ट के मुताबिक हॉस्टल की स्थिति काफी दयनीय है। वहां 20 से 25 छात्र रहते हैं। एक नेत्रहीन छात्र के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि संचालिका नेत्रहीन छात्राओं को अपमानित करती है और गलत काम करने के लिए दबाव बनाती है।

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