आदित्य हत्याकांड: इस तरह बच सकता है एमएलसी पुत्र रॉकी
पटना। बिहार के बहुचर्चित आदित्य हत्याकांड ने जहां बिहार की कानून व्यवस्था पर कई तरह के सवाल खड़े कर दिए हैं। वहीं एक शक अब गहराने लगा है। वो यह कि रॉकी यादव बच सकता है, क्योंकि उसका सहायक टेनी यादव गायब है। पुलिस को शक है कि हो सकता है गोली उसी ने चलायी हो।
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पूरे देश की नजर इस हत्याकांड पर टिकी हुई है। आखिरकार इस हत्या की वजह क्या थी। किसने चलाई आदित्य पर गोली।
गया व्यवसाई के पुत्र आदित्य की हत्या में अब तक जो बातें सामने आई हैं। उसमें कार ओवरटेक की वजह से हत्या की बात बताई जा रही है। लेकिन किसने गोली चलायी, यह बड़ा सवाल बना हुआ है। वारदात की रात रॉकी के गाड़ी में 3 लोग मौजूद थे। रॉकी यादव, बॉडीगार्ड राजेश और गाड़ी चालक टेनी यादव।
कहीं टेनी यादव ने तो नहीं चलाई गोली?
बिहार पुलिस टेनी यादव की तलाश कर रही है। टेनी यादव जो घटना के दिन यानि 7 मई को रॉकी यादब के साथ था तब से वो फरार है। एफआईआर में भी उसका नाम दर्ज किया गया है।
पुलिस के अनुसार लैंड रोवर से जब रॉकी गया लौट रहा था, तब टेनी यादव कार ड्राइव कर रहा था, रॉकी आगे की सीट पर बैठा था और उसका बॉडीगार्ड कारबाइन लेकर पीछे बैठा था। जैसा की एफआईआर में दर्ज है पिस्टल लिए शख्स ने सबसे पहले फायर किया और जब स्विफ्ट कार आगे जाकर रुकी तो ड्राइव कर रहे नासिर की नाक पर हमला किया। उसकी नाक से खून निकलने लगा था।

रॉकी के बॉडीगार्ड राजेश ने पीछे की सिट पर बैठे आदित्य, अंकित और आयुष के साथ मारपीट की। उस वक्त लैंड रोवर को ड्राइव कर रहा युवक गाड़ी के अंदर नहीं था। जिस गोली से आदित्य की मौत हुई वह गोली किसने चलाई इसको किसी ने नहीं देखा। स्विफ्ट में सवार आदित्य के दोस्तों ने भी नहीं।
घटना के बाद से रॉकी, राजेश और टेनी तीनों फरार हो गये। राजेश और रॉकी को तो पुलिस ने धर दबोचा, लेकिन टेनी अभी गायब है। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस जगह-जगह छापेमारी कर रही है।
अब सवाल यह उठता है कि जब रॉकी यादव गिरफ्तार हो गया बोडीगार्ड और बिंदी यादव गिरफ्तार हो गये तो फिर टेनी की गिरफ़्तारी अब तक क्यों नहीं?
पिता का इतिहास दोहरायेगा रॉकी
ऐसी आशंका जतायी जा रही है कि जिस दिन टेनी यादव पुलिस के हत्थे चढ़ेगा या फिर वह खुद आत्म्समर्पण करेगा उस दिन वह सारा गुनाह अपने सिर ले लेगा। और फिर रॉकी पर लगा हत्या का आरोप ट्रायल में फेल हो जायेगा। और रॉकी आजाद हो जायेगा।
असल में इस तरह का खेल खेलने में बिंदी यादव बहुत माहिर हैं। इससे पहले 2001 में जब वो हथियारों के खेप के साथ बिंदी यादव पकड़े गये थे, तब अदालत में अचानक पहुंच कर उनके ड्राईवर ने सारा आरोप अपने सिर ले लिया था। अब देखना है इस केस में पुलिस क्या करती है। हालांकि पुलिस ने तब बिंदी यादव के पास से लगभग 6000 के आसपास गोलियां बरामद की थीं। उस मामले में बिंदी यादव के ऊपर देशद्रोह का मामला दर्ज हुआ था। जिसमें हिंदी यादव कई महीने तक सलाखों के पीछे रहना पड़ा था।
आदित्य के खून से सने कपड़े सड़क पर
एक और सवाल गया पुलिस के विरुद्ध खड़ा होता है कि आखिर आदित्य के कपड़े पोस्टमॉर्टम हाउस के बाहर सड़क पर क्यों फेंक दिये गये। कपड़े खून से सने हुए थे, तो पुलिस ने जांच के लिये अपने पास संभाल कर क्यों नहीं रखे। वहीं पुलिस ने अब तक आदित्य के परिवार वालों को पोस्टमॉर्टम की रिपोर्ट नहीं सौंपी है। इसके अलावा रॉकी की पुलिस ने रिमांड में लेने में 36 घंटे से ज्यादा लगाये।
इन सब बातों के बीच साफ लग रहा है कि बिहार सरकार रॉकी यादव को बचाने की फिराक में है। यही कारण है कि आदित्य के माता-पिता ने इस मामले में सीबीआई जांच की मांग की है।












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