मांझी ने बिछाए नीतीश के लिए कांटे ही कांटे
नई दिल्ली(विवेक शुक्ला) हालांकि बिहार में राजनीतिक संकट खत्म हो गया है, पर अब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को अपने पूर्ववर्ती जीतन राम मांझी के कुछ फैसलों को बदलना कठिन होगा। मांझी ने नीतीश के रास्ते में बहुत सारे अवरोध खड़ कर दिए हैं।
उदाहरण के तौर पर सरकारी ठेकों में आरक्षण, संविदा पर बहाल शिक्षकों को वेतनमान देने के लिए कमेटी, गरीब सवर्णों को आरक्षण देने के लिए एक्सपर्ट कमेटी, पांच एकड़ भूमि रखने वालों को मुफ्त बिजली जैसे कुछ ऐसे फैसले हैं, जिन्हें नीतीश कुमार बदल नहीं सकेंगे।
ताबड़तोड़ फैसले
बिहार मामलों के जानकार शशि झा कहते हैं कि मांझी मंत्रिमंडल ने समाज के हर वर्ग और वोट बैंक को ध्यान में रखकर ताबड़तोड़ फैसले किए हैं। मांझी मंत्रिमंडल ने अनेक फैसले लिए, जिसमें से अधिकांश ने अगली सरकार के रास्तों में इतने कांटे बिछा रखे हैं कि उसे पलटने की हिम्मत दिखाना भी आसान नहीं होगा। यानी कि जीतन राम मांझी मंत्रिमंडल द्वारा लिए गए ताबड़तोड़ फैसलों को पलटना अब नई सरकार के लिए आसान नहीं होगा।
मामला सिर्फ तकनीकी नहीं
वैसे कहने वाले कह रहे हैं कि इन फैसलों को निरस्त करने के लिए नई सरकार को केवल राज्य मंत्रिमंडल की एक बैठक बुलाकर फैसला करना है। लेकिन यह मामला केवल तकनीकी नहीं, बल्कि नीतीश कुमार की अगुवाई में बनने वाली नई सरकार से जुड़ी पार्टियों के वोट बैंक से भी जुड़ा है।
अब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कह रहे हैं कि वे जीतन राम मांझी के कार्यकाल में लिए गए फैसलों के बारे में समीक्षा के दौरान किसी तरह का पूर्वाग्रह या दुर्भावना नहीं आने दूंगा। शासन पूर्वाग्रह से नहीं चलाया जा सकता।
मुसलमानों के मदरसे
एक बात और। मांझी ने मुसलमानों को भी अपनी तरफ खींचने की चेष्टा की थी। उन्होंने नए हज भवन का निर्माण और मदरसों को आधुनिक बनाने पर भी कुछ फैसले लिए थे। वैसे मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद नीतीश कुमार ने मीडिया से मुखातिब होते हुए कहा कि मेरी प्राथमिकताएं वही होंगी, जो पहले से रही हैं।
राज्य में कानून का राज, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, ऊर्जा और आधारभूत संरचनाओं के विकास को प्राथमिकताओं में शामिल किया जाएगा। अगर पिछले कुछ महीनों में इसमें कमी आई है तो उसकी भरपाई की जाएगी। जानकार मानते हैं कि कुल मिलाकर नीतीश सरकार के लिए मांझी सरकार के फैसलों को बदलना बेहद मुश्किल होगा।













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