कैसे पूरा होगा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का संकल्प?
पटना। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दोबारा सत्ता में आते ही संकल्प लिया था कि बिहार को शिखर तक पहुंचायेंगे। ये वो संकल्प थे जो आम जनता के दैनिक जीवन से जुड़े थे। लेकिन जिस तरह जिला प्रशासन काम कर रहा है, उससे ऐसा नहीं लगता है कि ये संकल्प पूरे हो पायेंगे।
बिहार में कल तक था तोहफा-तोहफा, आज तौबा-तौबा?

ज़िला प्रशासन का 'आर्डर विदाउट एक्शन' वाला मोड लोगों को ज्यादा चुभ रहा है। ऐसा नहीं है है कि हाकिम अच्छे नहीं हैं, लेकिन पता नहीं क्यों ऐसा लग रहा है कि उनके अन्य पदाधिकारी 'बिजी विदाउट वर्क' वाली बातों को चरितार्थ करने में लगे हैं। मतलब हाफ-डीप।
चलिये बात करते हैं विभागों और उनकी कार्यशैली की
उत्पाद विभाग
1 अप्रैल से शराब बंदी लागू होनी है, लेकिन उत्पाद विभाग की कार्यशैली व सोच दोनों मंद है। शराब न पियें इसके लिए इनका नाटक ज़िला प्रशासन के मंच पर दिख जायेगा, लेकिन इनका काम भी नाटक से कम नहीं है। किसी गांव में जाकर शराब बंदी के समर्थन में लोगों को जागरूक करते नज़र नहीं आएंगे। किसी गांव में जाकर नकली शराब के खिलाफ अभियान चलाने की अबतक कोई बात नहीं कही गई।
कागज़ पर तो ये विभाग अपने आप को 10 में 10 अंक ज़रूर देगा, लेकिन कल जिस तरह शराब पीने से एक व्यक्ति की आँख की रोशनी चली गयी अगर उस सवाल को पूछेंगे तो इनका दम फूलने लगेगा। लाइन होटलों में अवैध तरीके से शराब पिला रहे दुकानदारों के खिलाफ कोई अभियान नहीं चलाया गया है। गुटखा तो बंद आज तक नहीं हो पाया, सिगरेट का पता नहीं।
नगर निगम
बिहार के अधिकांश शहरों में जिधर देखो मच्छर। गन्दा नाला, कूड़े के ढेर, चिल्ड्रन पार्क में टूटे झूले, बेहाल सुभाष पार्क इनकी हीलाहवाली के गवाह हैं। फॉगिंग मशीन है पर दवा छिड़कने का काम केवल वीआईपी ज़ोन में होता है। असल में इनका काम केवल उन जगहों पर दिखाई देता है, जहां से मुख्यमंत्री या किसी बड़े केंद्रीय मंत्री का काफिला गुजरता है।
शिक्षा विभाग
प्राइवेट स्कूल व कोचिंग वाले सब इनके अपने हैं। इसीलिए कोचिंग एक्ट मैट्रिक के एग्जाम के बाद भी नहीं लागू होगा। नकलचियों की धरपकड़ तो जमकर हुई, लेकिन कभी ऐसे प्रबंध नहीं किये गये, कि बच्चों को नकल करने की नौबत नहीं आये।
बिजली विभाग
आइये ज़िले के लिए खासकर गलत बिल के नाम पर लोगों का बीपी बढ़ाने वाले इस विभाग को देख लीजिये। जनता से बिल वसूलने आते हैं तो जेल भिजवाने में तनिक देर नहीं लगाते, लेकिन सरकारी विभागों से रुपया वसूलने में इनको पसीने छूट जाते हैं। गर्मी का मौसम आ गया है और पूरे बिहार में बिजली की कटौती शुरू हो गई है। कई जिले हैं, जहां अगले दो-तीन महीने तक मात्र चार से पांच घंटे ही बिजली मिलेगी।












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