मानसून: सूखे ने गीले किए नरेंद्र मोदी सरकार के अरमान

मौसम विभाग ने पहले ही इस साल मानसून कम रहने का अनुमान लगाया था। मौसम विभाग ने 18 जुलाई के बाद बारिश की उम्मीद भले ही जता दी हो पर आम तौर से उलट माॅनसून की यह हालत किसानों के चेहरों पर सिलवटें ला रही है। सरकार ने कम मानसून से निबटने के लिए तैयारियां शुरू की हैं। इसी के तहत की गई बैठकों में कम मानसून होने पर 500 जिलों में आपात लगाने, किसानों को बीज और खाद सब्सिडी देेने की बात कही गई।
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विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, देश का 85 फीसदी बारिश की कमी का सामना कर रहा है। कम मानसून के चलते सबसे बुरा हाल मध्य भारत का है जहां अब तक सामान्य से 63 फीसदी कम बारिश हुई है। इस इलाके में चावल की पैदावार सबसे ज्यादा होती है। पूर्वोत्तर भारत में भी 22 फीसदी कम बारिश हुई है, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अब तक बारिश सामान्य के मुकाबले 71 फीसदी कम हुई है।
कम मानसून के चलते मोदी सरकार की दिक्कतें बढ़ सकती हैं। हालांकि आजतक से खास बातचीत में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कम मानसून में खराब हालात से निबटने के लिए सरकार की पहले से तैयारी होने का दावा किया। जेटली ने कहा, 'देश में खराब मानसून के कारण कोई संकट पैदा नहीं होगा। हालांकि अब नजरें 18 जुलाई पर टिकी हैं, जब विभाग की भविष्यवाणी सच हो व लोगों को राहत मिले।














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