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बिहार में शराब पर पाबंदी लगते ही मर गयी "नागिन"

पटना। बिहार मे पूर्ण शराबबंदी का ऐसा असर हुआ है कि नागिन तो मर ही गई, साथ-साथ अब वो सपेरे भी नहीं दिखाई देते जो घंटो तक नागिन को नचाते थे। अब आप सोच रहे होंगे कि शराब से नागिन का क्या लेना-देना है। क्या नागिन भी शराब पीती थी। ओफ कंफ्यूज मत होइये हम बात कर रहे हैं शादी में होने वाले नागिन डांस की। बारातों में कोई न कोई शराब पीकर डांस करने के लिये फेमस हो ही जाता है। इधर कुछ दिनों से शहर में बरातियों के लूर-लक्षण अलग दिख रहे हैं।

इस बच्ची का दर्द तुम क्या जानो नीतीश बाबू

Naagin died after Liquor ban in Bihar

पास से बारात गुजर रही थी। गाना रीमिक्स ज़रूर था, लेकिन पुराना गाना था। न नागिन, नागिन, न नथुनी पे गोली मारे सुनाई दिया। और ना ही मुन्नी बदनाम हो रही थी। भोजपुरी गाने जिन पर लोग थ‍िरक उठते थे- शामियाना में छेद, भौजी परेशान हो रही, लॉली पॉप लागे लू भी गायब सा महसूस हुआ।

100 की स्पीड से बढ़ती बारात

एक समय था जब नाचने वाले अपने पर आ जाते, तो बारात हर दस कदम पर रोकनी पड़ती थी। अब तो सभी लोग 100 की स्पीड में चुपचाप आगे बढ़े जाते हैं। और सुनिये द्वार पर भी जो जमकर डांस होता था, वो भी अब कम हो गया। आम तौर द्वार पर ही बैंड का सारा पैसा वसूला जाता है। अब पैसा वसूलना तो दूर, ऐसा लगता है फिलूल में बैंड मंगवाया। बैंड पर अब केवल बच्चे और कुछ लोग ही थ‍िरकते नजर आते हैं।

नहीं होता पियक्कड़ों का स्वागत

जब बारात द्वार पर पहुंचती है तब बारातियों का स्वागत माला पहनाकर किया जाता है। पीकर आये बाराती के गले में अगर माला न पड़े, तो उसे इंसल्ट महसूस होती थी। इस कारण बवाल का डर लड़की वालों को हमेशा लगा रहता था। अच्छा है अब लड़की वालों को टेंशन नहीं है क्योंकि अब उन्हें पियक्कड़ों का स्वागत नहीं करना पड़ता।

बैंड नहीं होता है लेट

फर्स्ट बैंड यानी 6 से 8 का समय, सेकेंड बैंड यानी 8 से 10 और थर्ड बैंड या‍नी 10 से रात 12 बजे का बैंड। पिछले कुछ महीने पहले तक बिहार में फर्स्ट बैंड पियक्कड़ों के दबाव में आकर स्वत: सेकेंड में बदल जाता था और सेकेंड थर्ड में और थर्ड की तो बात ही मत कीजिये, बारात पहुंचने में 1 बज जाते थे। अब बैंडवाले भी समय पर घर पहुंच जाते हैं और लाइट वाले भी।

सही में शराबबंदी के शॉक के बाद पूरा बिहार सुधर गया। सही समय पर बारात आने लगी है और लोग ढंग से खाना भी खा हरे हैं। वाकई मुख्यमंत्री ने काफी ऐतिहासिक निर्णय लिया है। अब समझ में आया कि इतनी शालीनता से बारात क्यों जा रही है। दोष इंसान में नहीं, शराब में था। उम्मीद है बाकी राज्यों में भी नागिन और मुन्नी बदनाम होना जल्द ही बंद हो जायेंगी।

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