बिहार में शराब बनाने वालों को मिली राहत
पटना। पटना हाईकोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा किए गए शराबबंदी मामले पर सुनवाई करते हुए शराब निर्माताओं को अंतरिम राहत देते हुए अगले आदेश तक उनके विरुद्ध किसी प्रकार की दंडात्मक कार्यवाही करने पर रोक लगा दी है।
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कोर्ट का यह भी कहना है कि प्रथम दृष्टया प्रतीत होता है कि शराब निर्माण करने वाली कंपनियों को जो भी आर्थिक क्षति हुई है, उसका पूरा हर्जाना मिलना चाहिए। न्यायमूर्ति नवनीति प्रसाद सिंह व न्यायमूर्ति चक्रधारी शरण सिंह की खंडपीठ ने कनफेडरेशनऑफ इंडियन अल्कोहलिक विवरेज कंपनी एवं अन्य द्वारा दायर एक अर्जी पर सुनवाई के दौरान आदेश को पारित किया।
अदालत का आगे यह भी मानना था कि निर्माताओ को शराब के बचे हुए स्टॉक को वापिस लेने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता है, क्योंकि बिहार राज बेवरेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड के साथ शराब बिक्री की प्रक्रिया कानूनन पूरी हो चुकी है।
कोर्ट ने सख्त मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि सरकार चाहे तो बिहार राज्य वेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड के पास बची शराब के स्टॉक को गंगा में फेकवा दे या जो चाहे करें। याचिका कार्यकर्ताओं ने यह भी कहा कि हमें विवरेज कॉर्पोरेशन के तरफ से कहां जा रहा है कि आप 15 दिनों के अंदर शराब के बचे स्टॉक वापस ले लें।
वहीं दानापुर के आर्मी कैंन्टानमेन्ट में शराब की बिक्री के संबंध में पूछे जाने पर राज्य सरकार के प्रधान अपर महाधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि शराब की बिक्री, सेवन, और रखरखाव एवं पर पूरे राज्य में एक समान कानून लागू है। लेकिन साथ में यह भी बताएं कि उनके कुछ अपने अलग नियम कानून भी हैं। इस मामले में आगे सुनवाई 19 अप्रैल को होगी।












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