अपनी परवाह ना कर, अनजान लोगों की भरपूर मदद की
पटना, मई, 26। कोरोनावायरस का संक्रमण मानव समुदाय पर संभवतः इस सदी की सबसे बड़ी त्रासदी है। कोविड-19 की दूसरी लहर भारत में अप्रत्याशित तबाही मचा रही है। इस समय ने हमारे स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ-साथ मानवता की भी कठिन परीक्षा ली है। एक तरफ जहां कई अपने अपनों से मुंह मोड़ रहे हैं तो वहीं अनेक ऐसे लोग भी हैं जो आगे बढ़कर जरूरतमंदो की मदद कर रहे हैं। आइए, इसी कड़ी में आपको मिलवाते हैं पटना के कुंदन कुमार मल्लिक से।
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कुंदन कुमार मल्लिक पेशे से एक मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव हैं। कोरोना के दूसरी लहर में लोगों की मदद करने के बारे में कुंदन मल्लिक ने वन इंडिया हिंदी से बात करते हुए बताया कि उनके अंदर मदद का ज़ज़्बा शुरु से ही रहा है। वे अनेक रक्तदान समूहों से जुड़े हुए हैं। पहली लहर का कहर जहां कुछ ही राज्यों पर टूटा था वहीं दूसरी लहर बिहार जैसे कमजोर इंफ्रास्ट्रक्चर वाले प्रदेश में और विकराल रूप धारण कर लिया। राज्य-सरकार ने लॉक-डाउन की घोषणा कर दी थी और अनेक लोगों की तरह कुंदन मल्लिक भी घर पर ही समय बिता रहे थे। एक दिन अचानक एक व्हाट्सऐप ग्रुप में पटना में इलाज करा रहे किसी कोविड मरीज के लिए 'रेमडेसिविर' की तत्काल अवश्यकता का मैसेज इन्हें मिला। उन्होंने अविलंब किसी स्टाकिस्ट से संपर्क किया और तुरंत उस जरूरतमंद तक 'रेमडेसिविर' इंजेक्शन पहुंचवा दिया। इसके बाद यह सिलसिला चल पड़ा। पटना सहित प्रदेश भर से लोगों के कॉल और मैसेज आने लगे। कई बार बिहार से बाहर से भी कॉल आते थे।
कुंदन मल्लिक कहते हैं कि चूंकि वे फार्मा इंडस्ट्री में ही कार्यरत हैं, उन्हें रेमडेसिविर के निर्माता और अनेक प्रदेशों में इसके थोक-विक्रेता और आपूर्तिकर्त्ताओं की जानकारी थी। इस प्रकार यह उनके लिए आसान था। अपने प्रोफेशनल नेटवर्क का इस्तेमाल कर वे उस स्थान विशेष पर रेमडेसिविर की उपलब्धता के बारे में पताकर बाजार मूल्य से भी कम पर उक्त दवा जरूरतमंदों तक पहुंचवाने लगे, जबकि दूसरी तरफ ऊंचे दामों पर रेमडेसिविर जैसी दवाओं की कालाबाजारी की खबरें भी आ रही थी। इस बीच रेमडेसिविर के अतिरिक्त अन्य दवाओं के लिए भी लोग इन्हें संपर्क करने लगे और ये यथासंभव मदद करते रहे।
इसी बीच एक केस में तमाम कोशिशों के बाद मरीज को बचाया नहीं जा सका और अंतिम संस्कार के लिए उनके परिजन आगे नहीं आए तो कुंदन मल्लिक ने पटना के प्रसिद्ध समाजसेवी पुरुषोत्तम सिंह जैसे लोगों की मदद से उनका अंतिम संस्कार करवाया। उसके बाद ये अन्य लोगों को भी लावारिस शवों का अंतिम संस्कार करवाने के लिए प्रेरित करने लगे। इसके साथ कुंदन मल्लिक आस-पड़ोस में होम-आइसोलेशन में रहने वाले कोरोना-पीड़ित परिवारों से फोन पर लगातार संपर्क में रहते हैं और उनतक भोजन और जरूरत के सामानों की आपूर्ति सुनिश्चित करते हैं।
वन इंडिया के सवाल, "क्या आपको कोरोना से डर नहीं लगता है?" के जवाब में कुंदन मल्लिक कहते हैं, "डर तो वास्तव में बहुत लगता है। मेरा भी घर परिवार है। एक छोटा बच्चा है। लेकिन किसी और की जरूरत बहुत बड़ी है। मैं सुरक्षा का पूरा ख्याल रखता हूं। दवाओं की आपूर्ति तो मैं फोन और व्हाट्सऐप पर ही करवा देता हूं। कई बार लोगों को भोजन, पीपीई किट तथा अन्य सामान देने के लिए जाना पडता है तो मैं डबल मास्क, फेस-शिल्ड, और निरंतर सेनिटायजर का इस्तेमाल सुनिश्चित करता हूं। मैं किसी के संपर्क में आने से बचता हूं और घर के बाहर ही सामान रखकर उन्हें फोन कर देता हूं। यदि अस्पताल या अंतिम संस्कार में जाना पड़ा तो पीपीई किट पहनकर ही जाता हूं। इसके अतिरिक्त मैंने अपने लिए एक अलग फ्लैट की व्यवस्था कर ली है। कहीं बाहर से आने के बाद वहां खुद को पूरी तरह सेनिटाइज कर, स्टीम इन्हेलेशन और गर्म पानी से गरारा करने के बाद ही घर जाता हूं। इसके अतिरिक्त मैंने फ्लू और निमोनिया दोनों का वैक्सिन लगवा लिया है। अतः मैं जनता हूं कि मैं बहुत कम रिस्क पर हूं। हर जान की कीमत उतनी ही है। मैं हर किसी से आग्रह करता हूं कि जितना हो सके दूसरों की मदद करें लेकिन तमाम एहतियात और सुरक्षा साधनों के साथ।"












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