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बिहार के लिए राहत की खबर, इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च ने पटना एम्स को दी प्लाज्मा थेरेपी की अनुमति

पटना । इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च ने पटना एम्स को कोरोना संक्रमित गंभीर मरीजों का इलाज प्लाज्मा थेरेपी से करने के लिए को मंजूरी दे दी है। बता दें कि पिछले दो दिनों से कोरोना का भीषण हमला झेल रहे बिहार के मरीजों के लिए काफी राहत वाली खबर है। बिहार सरकार के स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव ने यह जानकारी देते हुए बताया कि पटना एम्स में प्लाज्मा थेरेपी से इलाज की मुकम्मल तैयारी शुरू कर दी गई है और इसे बहुत जल्द शुरू कर दिया जाएगा।

indian council of medical research gives permission for plasma therapy to patna aiims

क्‍या होती है प्‍लाज्‍मा थैरेपी

दरअसल संक्रमण से ठीक हुए व्यक्ति के शरीर में उस वायरस के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता बन जाती है और 3 हफ्ते बाद उसे प्लाज्मा के रूप में किसी संक्रमित व्यक्ति को दिया जा सकता है ताकि उसके शरीर में प्रतिरोधक क्षमता बढ़ने लगे। प्लाज्मा संक्रमण से ठीक हुए व्यक्ति खून से अलग कर निकाला जाता है। एक बार में एक संक्रमण से ठीक हुए व्यक्ति के शरीर से 400ml प्लाज्मा निकाला जा सकता है। इस 400ml प्लाज्मा को दो संक्रमित मरीजों को दिया जा सकता है।

स्वस्थ हो चुके मरीज के शरीर में एंटीबॉडी बन जाती है जो उस वायरस से लड़ने के लिए होती है। एंटीबॉडी ऐसे प्रोटीन होते हैं जो इस वायरस को डिस्ट्रॉय या खत्म कर सकते हैं। तो वो एंटीबॉडी अगर प्लाज्मा के जरिए किसी मरीज को चढ़ाएं तो वह एंटीबॉडी अभी जो मरीज है जो उसके शरीर में मौजूद वायरस को मार सकती है। प्लाज्मा थेरेपी कोई नई थेरेपी नहीं है। डॉक्टरों का मानना है की ये एक प्रॉमिनेंट थेरपी है जिसका फायदा भी हुआ और कई वायरल संक्रमण में इसका इस्तेमाल भी हुआ है।

ऐसे शुरू हुआ प्‍लाज्‍मा थेरेपी का प्रयोग
दरअसल एक ही परिवार के कई लोग बीमार होने के बाद मैक्स में भर्ती हुए थे जिनमें से दो वेंटिलेटर पर चले गए थे। बाकी ठीक हो चुके थे। इसी बीच वेंटिलेटर पर मौजूद एक मरीज की मौत हो चुकी थी लेकिन दूसरा मरीज वेंटिलेटर पर ही था। इसी मरीज पर ट्रायल शुरू किया गया। विशेषज्ञों के अनुसार एक व्यक्ति के खून से अधिकतम 800 मिलीलीटर प्लाजमा लिया जा सकता है। वहीं कोरोना से बीमार मरीज के शरीर में एंटीबॉडीज डालने के लिए लगभग 200 मिलीलीटर तक प्लाजमा चढ़ाया जा सकता है। इस तरह एक ठीक हो चुके व्यक्ति का प्लाजमा 3 से 4 लोगों के उपचार में मददगार हो सकता है।

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