Bharat Tiwari Encounter: भरत तिवारी के परिजनों से मिले प्रशांत किशोर, की ऐसी मांग, सम्राट चौधरी की उड़ी नींद

Prashant Kishor Meet Bharat Tiwari Family: बिहार के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में अब राजनीति भी तेज हो गई है। जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने भरत तिवारी के परिवार से मुलाकात के बाद सरकार और प्रशासन पर कई गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि न्याय केवल एनकाउंटर में शामिल पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई से नहीं मिलेगा, बल्कि उन अधिकारियों और नेताओं की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए जिनके फैसलों और कार्यशैली के कारण हालात यहां तक पहुंचे।

प्रशांत किशोर ने सिटिंग जज से न्यायिक जांच कराने की मांग करते हुए गृह विभाग, एसटीएफ और शीर्ष अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल की जरूरत बताई है। उनके बयान के बाद बिहार की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है।

Prashant Kishor Meet Bharat Tiwari

परिवार से मिलकर न्याय की मांग दोहराई

भरत तिवारी के घर पहुंचकर प्रशांत किशोर ने उनकी मां, बहन और अन्य परिजनों से मुलाकात की। मुलाकात के बाद उन्होंने कहा कि परिवार की मांग बिल्कुल स्पष्ट है। उन्हें किसी तरह का मुआवजा, सरकारी नौकरी या आर्थिक सहायता नहीं चाहिए, बल्कि केवल न्याय चाहिए। प्रशांत किशोर ने कहा कि परिवार का मानना है कि इस मामले में सिर्फ कार्रवाई करने वालों पर नहीं, बल्कि कार्रवाई करवाने वालों पर भी कानूनी कदम उठाए जाने चाहिए। तभी उन्हें वास्तविक न्याय मिलने का एहसास होगा।

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सिटिंग जज से Bharat Tiwari Encounter की न्यायिक जांच की मांग

जन सुराज प्रमुख ने कहा कि सरकार को इस मामले की जांच किसी रिटायर्ड जज के बजाय सिटिंग जज से करानी चाहिए। उन्होंने मांग की कि पूरी न्यायिक जांच प्रक्रिया तीन महीने के भीतर पूरी हो और उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। प्रशांत किशोर का कहना है कि मामले को लेकर लोगों के मन में कई सवाल हैं, जिनका जवाब निष्पक्ष जांच से ही मिल सकता है। उन्होंने कहा कि पारदर्शी जांच से ही लोगों का भरोसा न्याय व्यवस्था पर कायम रहेगा।

"भरत पागल नहीं था, सिस्टम ने उसे मजबूर किया"

प्रशांत किशोर ने कहा कि भरत तिवारी को केवल एक अपराधी या मानसिक रूप से अस्थिर व्यक्ति के रूप में देखना गलत होगा। उनके अनुसार भरत लगातार अपनी समस्याओं और शिकायतों को अधिकारियों तक पहुंचाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन उसे सुनने वाला कोई नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासनिक लापरवाही और सिस्टम की अनदेखी ने उसे ऐसे हालात में पहुंचा दिया जहां उसके सामने विकल्प सीमित हो गए। इसलिए पूरे घटनाक्रम की गहराई से जांच आवश्यक है।

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गृह विभाग, STF और DGP की भूमिका पर सवाल

प्रशांत किशोर ने कहा कि जांच का दायरा सिर्फ भोजपुर पुलिस या स्थानीय अधिकारियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने मांग की कि बिहार गृह विभाग, एसटीएफ, डीजीपी कार्यालय और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की भी जांच हो। उनका कहना है कि यह पता लगाया जाना चाहिए कि घटनाक्रम के दौरान कौन-कौन से निर्णय लिए गए और किस स्तर पर निर्देश जारी हुए। यदि जांच केवल निचले स्तर तक सीमित रही तो कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने नहीं आ पाएंगे।

किसके आदेश पर हुई कार्रवाई? उठे बड़े सवाल

जन सुराज प्रमुख ने सवाल उठाया कि आखिर एनकाउंटर के दौरान कार्रवाई का अंतिम आदेश किस स्तर से आया था। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट होना चाहिए कि स्थानीय अधिकारियों ने अपने स्तर पर फैसला लिया था या फिर पटना में बैठे वरिष्ठ अधिकारियों अथवा राजनीतिक नेतृत्व से निर्देश मिले थे। प्रशांत किशोर के अनुसार न्यायिक जांच का मुख्य उद्देश्य इन्हीं सवालों का जवाब तलाशना होना चाहिए। जब तक आदेश की पूरी श्रृंखला सामने नहीं आएगी, तब तक विवाद खत्म नहीं होगा।

सम्राट चौधरी की बढ़ सकती है राजनीतिक मुश्किल

प्रशांत किशोर के बयान के बाद बिहार के मुख्यमंत्री और गृह विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे सम्राट चौधरी भी राजनीतिक बहस के केंद्र में आ सकते हैं। भरत तिवारी मामले पर एक रैली में सम्राट चौधरी ने कहा था, "मेरे पुलिस पर किसने बंदूक उठाया?" जिसे सरकार के सख्त रुख के तौर पर देखा गया था। अब प्रशांत किशोर ने गृह विभाग और राजनीतिक नेतृत्व की भूमिका की जांच की मांग उठाकर दबाव बढ़ा दिया है। यदि जांच का दायरा विस्तृत होता है तो सरकार को विपक्ष के तीखे सवालों का सामना करना पड़ सकता है।

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