पटना फर्जी मुठभेड़ में थानाध्यक्ष को फांसी, 7 पुलिसकर्मियों को उम्रकैद

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28 दिसंबर 2002 में हुई इस मुठभेड़ में तीन युवकों, हिमांशु, विकास, प्रशांत को डकैत बताते हुए एनकाउंटर कर दिया गया था, जिसकी जांच में सामने आया था कि यह मुठभेड़ फर्जी थी व आरोपियों पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया था।
थाना प्रभारी शम्से आलम को फांसी की सजा सुनाई गई है व साथी 7 पुलिसवालों के लिए उम्रकैद की सजा तय की गई है। इस दर्दनाक हादसे के वक्त पुलिस की कार्यशैली पर त्वरित सवाल उठे थे, जिसके बाद जांच में मुकदमे का आधार पेश किया गया था। अब जाकर न्याय की चौखट से फैसला आया है, जिसने साबित कर दिया है कि चंद खाकी धारी किस तरह वर्दी को बदनाम करते हैं।












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