बिहार में कल तक था तोहफा-तोहफा, आज तौबा-तौबा?
बेंगलुरु। फेसबुक पर मौका-मौका, कोलकाता में चौका-चौका और बिहार में तोहफा-तोहफा!!! ओह सॉरी तोहफा-तोहफा नहीं तौबा-तौबा! जी हां हम उन्हीं तोहफों की बात कर रहे हैं, जिन्हें लौटाने का ऐलान बिहार में भाजपा विधायकों ने किया है। लेकिन गजब हैं हमारे नेता लोग भी, जो गिफ्ट कल तक सदन का सम्मान था, आज उसी को ठुकरा रहे हैं।
विस्तार से बात करे तो भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार और प्रदेश अध्यक्ष मंगल पांडेय के नेतृत्व में यह ऐलान किया है कि सरकार द्वारा मिले तोहफे को भाजपा के सभी विधायक लौटायेंगे। उनका कहना है कि राज्य में लाखों टीचरों को कई महीनों से वेतन नहीं मिला है। उनके घरों में चूल्हा नहीं जल पा रहा है, तो हम तोहफा कैसे ले सकते हैं। साथ ही सुशील मोदी ने बिहार सरकार को जमकर खरी खोटी सुनायी।
तोहफे की परम्परा
नीतीश सरकार ने इस पर क्या कहा, यह हम आपको नीचे बतायेंगे, लेकिन उससे पहले जान लीजिये कि यह परम्परा है क्या? असल में बिहार सरकार हर साल बजट सत्र के पहले विधायकों को गिफ्ट देती है। यह परम्परा आज की नहीं, कई दशक पुरानी है। बस फर्क इतना है कि पेन, डायरी, कैलेंडर दिये जाते थे, अब स्मार्ट फोन, माइक्रोवेव और सूटकेस दिये जाते हैं।
नीतीश सरकार का जवाब
नीतीश सरकार में खाद्य एवं रसद मंत्री श्याम रजक ने वनइंडिया की संवाददाता शालिनी शर्मा से बातचीत में कहा कि सुशील मोदी 'छपासू बाबा' हैं। बहुत दिनों से मीडिया में दिख नहीं रहे थे, तो उन्होंने इस मुद्दे को उठाकर लाइमलाइट में आने के प्रयास किये हैं। रही बात गिफ्ट की तो यह परम्परा वर्तमान सरकार ने नहीं शुरू की है। यह दशकों पुरानी परम्परा है। और सुशील कुमार पहले भी ये गिफ्ट स्वीकार करते आये हैं, तब उन्हें किसी टीचर की याद क्यों नहीं आयी।
श्याम रजक ने कहा, "रही बात गिफ्ट पर खर्च की तो यह जनता के पैसे से खरीदे गये गिफ्ट नहीं हैं। और कुछ लाख ही तो इस पर खर्च होते हैं, इसमें गलत ही क्या है हम इस परम्परा को बंद नहीं करेंगे।"













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