शराबबंदी पर पक्ष-विपक्ष ने खाई कसम, न पिएंगे न पीने देंगे

पटना (मुकुंद सिंह)। 1 अप्रैल से प्रदेश में शराब बंदी लागू करने के सरकार के निश्चय मे केवल सत्ता पक्ष ही नही बल्कि विपक्ष भी साथ है। विधान मंडल में पक्ष विपक्ष ने बिहार उत्पाद संशोधन विधेयक 2016 को सर्वसम्मति से पारित कर दिया। विधानमंडल ने न केवल विधायक को पारित किया बल्कि यह भी संकल्प लिया कि हम नहीं पीएंगे और ना किसी को पीने देंगे। संकल्प लेने का प्रस्ताव भाजपा की ओर से आया था। उस पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने यह कहते हुए सहमति दी कि आज यहां से कानून बना है तो क्यों ना आज यहीं से कानून की सख्ती से लागू करने का संकल्प लें।

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Bihar lawmakers pledge not to drink alcohol

इससे पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विधायक पर चल रही चर्चा में हस्तक्षेप करते हुए कहा कि सरकार का मकसद सिर्फ सख्त कानून बनाना ही नहीं बल्कि इसका लत भी छुड़ाना है। लत छुड़ाने के लिए सभी जिलों में डिएडिक्शन सेंटर बनाया गया है। इतना ही नहीं डॉक्टरों की टीम को परीक्षण भी दिया गया है। सरकार का निश्चय है कि राज्य में पूर्ण शराब बंदी लागू करना है। इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है। पहले देशी व मसालेदार शराब को बंद किया जा रहा है, इसके बाद विदेशी शराब को भी बंद किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार के फैसले गांव में जबरदस्त उत्साह का वातावरण बना है। इसमें महिलाएं चढ़कर भाग ले रही है। गांव में व्यापक पैमाने पर जागरुकता अभियान चलाया जा रहा है इसमें शिक्षकों के अलावा आगनबाडी सेविका, सहायिका, महिला समाख्या स्वयं सहायता समूह सेजुड़ी महिलाएं, नर्स, एएनएम को लगाया गया है। 29 मार्च तक इसका अभियान में लगे 1 करोड़ बच्चों ने अपने अभिभावको से शराब न पीने का शपथ स्कूल में माध्यम से सरकार को भेजा है। इतना ही नहीं 7 लाख से अधिक जगहों पर नारे लिखे गए हैं तथा 88434 जगह पर नुक्कड़ नाटक का आयोजन किया गया है। जन जागरण अभियान 31 मार्च तक चलेगा।

गांवों में नजायज शराब की भठ्ठी चल रहे हैं तो उसकी सूचना टोल फ्री नंबर से विभाग को दें। राज्य के अंदर 6 करोड़ मोबाइल है इसके माध्यम से मैसेज भेज लोगों को जागरुक किया जा रहा है। हर थाना को सर्टिफिकेट देना होगा कि उनके क्षेत्र में अवैध शराब का कारोबार या विदेशी व मसालेदार तरह की बिक्री नहीं हो रही है। शहरों में भी शराब बंदी के पक्ष में वातावरण बन रहा है। इसके पूर्व विजय कुमार सिन्हा संजय सागरी और अरुण कुमार सिन्हा संसोधन प्रस्ताव पेश किया जिसमें ध्वनिमत से खारिज कर दिया गया।

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