जीत के बाद नीतीश-लालू के गठबंधन में पड़ने लगी दरार

पटना। बिहार में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का तोड़ निकालने के लिए सत्ताधारी पार्टी जनतादल यूनाइडेट ने अपने धुरविरोधी राष्ट्रीय जनता दल का हात थाम लिया। उनका ये गठबंधन सफल भी हुआ। लालू-नीतिश के गठबंधन के सामने मोदी के जादू की एक नहीं चली और उपचुनावों में इस गठबंधन का बोलबाला रहा। उपचुनाव में 6-4 से जीत हासिल करने के सात ही अब इस गठबंधन में दरार पड़ने लगी है।

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विधानसभा की दस सीटों पर उपचुनाव में बीजेपी बनाम महागठबंधन की घमासान में मामला 6-4 से महागठबंधन के पाले में भले झुका हो, लेकिन बांका सीट की हार महागठबंधन में विवाद की वजह बन गई है। इस सीट पर हार को लेकर दोनों ही दल एक दूसरे पर हार का ठीकरा फोड़ रहे हैं। बांका सीट से आरजेडी उम्मीदवार के बीजेपी प्रत्याशी से मात्र 711 मतों से हारने पर आरजेडी और जदयू के बीच तकरार और आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।

बांका से आरजेडी प्रत्याशी इकबाल हुसैन अंसारी बीजेपी उम्मीदवार राम नारायण मंडल के हाथों 711 मतों से हार गए। हारे तो हारे लेकिन अपने हार के लिए उन्होंने अपनी प्रदेश के पर्यटन मंत्री और जेडीयू नेता जावेद इकबाल अंसारी को जिम्मेवार ठहरा दिया। इसी बात को लेकर दोनों दलों में दरार पड़ती नजर आ रही है। जावेद ने इकबाल के आरोप को बेबुनियाद करार देते हुए कहा है कि आरजेडी उम्मीदवार उनके पुराने विरोधी हैं इसलिए वह उनपर उंगली उठा रहे हैं।

उन्होंने तो ये तक कह दिया कि आरजेडी ने गलत उम्मीदवार का चुनाव किया जिसकी वजह से इस सीट पर उन्हें हार मिली है। जावेद ने कहा कि अगर उनकी जगह किसी दूसरे को उम्मीदवार बनाया जाता तो वे आसानी से चुनाव जीत जाते।

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