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हनीप्रीत को राहत: अदालत ने देशद्राेह के आरोप हटाए, अंबाला की सेंट्रल जेल में काट रही सजा

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    Honeypreet case में आया फैसला, कोर्ट ने इन धाराओं को हटाया | वनइंडिया हिंदी

    पंचकूला। बलात्कार के जुर्म में उम्रकैद भुगत रहे राम रहीम की खास हनीप्रीत को अदालत ने राहत दी है। हनीप्रीत के खिलाफ पुलिस द्वारा लगाई गई देशद्रोह की धाराएं पंचकूला की अदालत ने हटवा दी हैं। इससे हरियाणा पुलिस को बड़ा झटका लगा है, वहीं राम रहीम के समर्थकों को खुशी मिली है। हनीप्रीत को राम रहीम की राजदार माना जाता है। उस पर अगस्‍त 2017 में राम रहीम को दुष्‍कर्म के मामले में दोषी ठहराने के बाद हुई हिंसा के मामले में देशद्रोह समेत कई धाराओं में केस दर्ज किया गया था। जिसमें हनीप्रीत को मुख्‍य आराेपित माना गया। मगर, अब जब​ कोर्ट ने देशद्रोह की धारा हटवा दी है तो हनीप्रीत के खिलाफ हरियाणा पुलिस देशद्रोह का केस नहीं चला पाएगी।

    पंचकूला की अदालत में हुई हनीप्रीत की पेशी

    पंचकूला की अदालत में हुई हनीप्रीत की पेशी

    शनिवार को पंचकूला की अतिरिक्त सेशन कोर्ट में वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिये हनीप्रीत की पेशी हुई। हनीप्रीत अंबाला की सेंट्रल जेल में बंद है। सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सेशन जज संजय संधीर की बेंच ने हरियाणा पुलिस द्वारा पंचकूला में 25 अगस्त 2017 को हुई हिंसा में मुख्य आरोपित हनीप्रीत पर लगीं देशद्रोह की धाराओं को हटाया। इस केस में बहस के बाद आरोप तय किए गए। हनीप्रीत के खिलाफ एफआईआर 28 अगस्त 2017 को दर्ज की गई थी।

    राम रहीम को 2017 में हुई थी 20 साल की सजा

    राम रहीम को 2017 में हुई थी 20 साल की सजा

    राम रहीम सुनारिया जेल-रोहतक में उम्रकैद भुगत रहा है। वर्ष 2017 में 29 अगस्त को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत ने राम रहीम को दोषी मानते हुए 20 साल की सजा सुनाई थी। राम रहीम का पूरा नाम गुरमीत राम रहीम सिंह है। वह 'डेरा सच्चा सौदा' का प्रमुख है। उसे अपनी दो शिष्याओं के साथ दुष्कर्म करने और आपराधिक धमकी देने के अपराध में यह सजा हुई।

    30 लाख का जुर्माना भी लगाया गया था

    30 लाख का जुर्माना भी लगाया गया था

    राम रहीम को दो साध्वियों के साथ रेप के आरोप में 10-10 साल की अलग-अलग सजा भुगतनी पड़ रही है। साथ ही कोर्ट ने राम रहीम पर 30 लाख का जुर्माना भी लगाया था। फैसला सीबीआई की विशेष अदालत के न्यायाधीश जगदीप सिंह ने सुनाया था। यह अदालत रोहतक के पास सुनारिया की जिला जेल के पुस्तकालय में बनाई गई थी।

    1999 में शिष्याओं को बनाया था हवस का शिकार

    1999 में शिष्याओं को बनाया था हवस का शिकार

    राम रहीम के खिलाफ वैसे तो बहुत केस चल रहे हैं। मगर, जिस जुर्म में वह सजा भुगत रहा है, वह मामला 1999 का है। राम रहीम पर 1999 में अपनी दो शिष्याओं के साथ दुष्कर्म करने के आरोप थे। इस मामले में उसके द्वारा आपराधिक धमकी भी दी गई थीं। कई साल बाद दुष्कर्म के मामले में 2002 में शिकायत दर्ज हो पाई। राम रहीम ने गवाहों पर भी हमले करवाए थे।

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