इस वैश्विक संकट से निपटने के लिए अमेरिका ने मांगा भारत का साथ, क्या करेगी मोदी सरकार?

यूक्रेन युद्ध के बाद भारत-रूस के बीच आर्थिक सहयोग के विकास के लिए कई संस्थागत तंत्र स्थापित किए गए हैं और दोनों देश अपनी स्थानीय करेंसी में व्यापार करने की तरफ आगे बढ़ रहे हैं।

वॉशिंगटन, जून 26: यूक्रेन युद्ध के बीच अमेरिका ने एक बार फिर से भारत से बड़ी मदद मांगी है और रूस पर दबाव बनाने के लिए अमेरिका ने भारत के साथ की बात कही है। अमेरिका के नेशनल सिक्योरिटी कॉर्डिनेटर जॉन किर्बी ने शनिवार को कहा है कि, भारत और अमेरिका के बीच एक गहरी साझेदारी है और भारत चाहता है, कि यूक्रेन युद्ध में भारत रूस के खिलाफ प्रेशर बनाने का काम करे।

अमेरिका ने मांगी भारत की मदद

अमेरिका ने मांगी भारत की मदद

अमेरिका के नेशनल सिक्योरिटी कॉर्डिनेटर जॉन किर्बी ने शनिवार को कहा कि अमेरिका चाहता है कि भारत सहित अन्य देश यूक्रेन संघर्ष के बीच रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर युद्ध के दौरान उसकी कीमत और युद्ध का परिणाम क्या हो सकता है, ये बताने के लिए अमेरिका की मदद करें। एक ज्वाइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए अमेरिकी सुरक्षा अधिकारी जॉन किर्बी ने कहा कि, 'अमेरिका भारत के साथ एक गहरी साझेदारी साझा करता है, लेकिन वाशिंगटन चाहता है कि यूक्रेन संघर्ष के बीच रूस पर अंतरराष्ट्रीय दबाव हो'। उन्होंने कहा कि, 'हमें खुशी है कि भारत हमारे साथ आ रहा है। भारत के साथ एजेंडा पर चर्चा करने के लिए बहुत कुछ है। हमारी उनके साथ बहुत गहरी साझेदारी है, यहां तक कि रक्षा जगत में भी'।

तेल पर भारत को संदेश

तेल पर भारत को संदेश

अमेरिकी अधिकारी ने कहा है कि, 'भारतीय नेता अपनी बात रखने के लिए स्वतंत्र हैं, लेकिन निश्चित तौर पर बाइडेन प्रशासन का फोकस इस बात पर है, कि रूस को इस युद्ध की कीमत ज्यादा से ज्यादा चुकाना पड़े और पुतिन के लिए युद्ध जारी रखना कठिन हो जाए और जाहिर है, हम अपने सभी सहयोगी देशों से ऐसा ही चाएंगे।' भारत ने हाल के सप्ताहों में मास्को पर वैश्विक प्रतिबंधों के बावजूद रूस से ऊर्जा आयात में वृद्धि की है। अमेरिकी अधिकारियों ने भारत को संदेश दिया है कि, रूस से ऊर्जा आयात पर कोई प्रतिबंध नहीं है, लेकिन अमेरिका इसमें तेजी नहीं देखना चाहता है'।

रूस पर अमेरिका बनाम भारत

रूस पर अमेरिका बनाम भारत

आपको बता दें कि, यूक्रेन युद्ध के बाद भारत-रूस के बीच आर्थिक सहयोग के विकास के लिए कई संस्थागत तंत्र स्थापित किए गए हैं और दोनों देश अपनी स्थानीय करेंसी में व्यापार करने की तरफ आगे बढ़ रहे हैं। लिहाजा, यूक्रेन में युद्ध शुरू करने के बाद पश्चिमी देशों ने रूस के खिलाफ जितने भी प्रतिबंध लगाए हैं, वो अभी तक कारगर नहीं हो पाई है। पश्चिमी देशों ने कई रूसी व्यापार को प्रतिबंधित कर दिया है। जबकि, भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इस महीने की शुरुआत में यूक्रेन युद्ध के बीच रूस से भारतीय तेल खरीद की अनुचित आलोचना पर पलटवार किया था, जिसने विश्व अर्थव्यवस्था पर असर डाला है। रूस से भारत के तेल आयात का बचाव करते हुए जयशंकर ने जोर देकर कहा था, कि यह समझना महत्वपूर्ण है कि यूक्रेन संघर्ष विकासशील देशों को कैसे प्रभावित कर रहा है। उन्होंने यह भी सवाल किया कि केवल भारत से ही सवाल क्यों किया जा रहा है जबकि यूरोप यूक्रेन युद्ध के बीच रूस से गैस का आयात जारी रखे गुए हैं।

जयशंकर ने दिया था तीखा जवाब

जयशंकर ने दिया था तीखा जवाब

इस सवाल के जवाब में, कि क्या रूस से भारत का तेल आयात यूक्रेन में चल रहे युद्ध के लिए फंडिंग नहीं कर रहा है, भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा था, कि 'देखिए, मैं बहस नहीं करना चाहता। अगर भारत रूस से तेल खरीद रहा है तो युद्ध के लिए फंडिंग कर रहा है... तो मुझे बताओ तो रूसी गैस खरीदना युद्ध का वित्त पोषण नहीं कर रही है? और ये क्या सिर्फ भारतीय धन ही है, जिसका इस्तेमाल रूस इस युद्ध में कर रहा है। आखिर यूरोप के देश रूस से गैस क्यों खरीज रह हे है। स्लोवाकिया में GLOBSEC 2022 ब्रातिस्लावा फोरम में, जयशंकर ने कहा था, यूरोपीय संघ ने रूस के खिलाफ जिन प्रतिबंधों का ऐलान किया है, उनमें कई प्रतिबंध पश्चिमी देशों के हों को ध्यान में रखकर लगाए गये हैं।

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