अमेरिका के नए फॉर्मूले के बाद NSGमें भारत तो होगा लेकिन पाक नहीं होगा!
परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) में नए मेंबर की एंट्री के लिए तैयार हुआ एक नया ड्राफ्ट। एनएसजी के पूर्व चेयरमैन की ओर से तैयार इस ड्राफ्ट ने बटोरीं अमेरिका और पाकिस्तान में सुर्खियां।
इस्लमाबाद। पाकिस्तान की मीडिया में इन दिनों अमेरिका में परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) में नए मेंबर की एंट्री को लेकर तैयार किए गए नए ड्राफ्ट को लेकर खासी चर्चा है। इस ड्राफ्ट को एनएसजी के पूर्व चेयरमैन राफेल मैरियानो ने तैयार किया है। इस ड्राफ्ट को सिर्फ ड्राफ्ट नहीं माना जा रहा है बल्कि पाक मीडिया इसे एनएसजी में भारत की एंट्री के लिए तैयार किए गए अमेरिकी फॉर्मूले की तौर पर देख रही है।

पाक मीडिया में फॉर्मूले की चर्चा
पाक के अखबार डॉन की ओर से इस बारे में खास जानकारी दी गई है। इस नए ड्राफ्ट में भारत को तो एनएसजी में शामिल करने की वकालत की गई है लेकिन पाक को इससे बाहर रखने की बात कही गई है। अमेरिका के ऑर्म्स कंट्रोल एसोसिएशन (एसीए) की ओर से यह जानकारी दी गई है। लेकिन साथ ही एसीए ने वॉर्निंग भी दी है कि नए देशों को एनएसजी में शामिल करने के लिए नियमों में ढील देने से परमाणु अप्रसार को नुकसान पहुंच सकता है। अमेरिकी मीडिया में पिछले हफ्ते एक रिपोर्ट आई थी जिसमें कहा गया था कि मैरियानो ने दो पेज का एक डॉक्यूमेंट तैयार किया गया है। इस डॉक्यूमेंट में साफ किया गया है कि कैसे नॉन-एनपीटी देश जैसे भारत और पाक को एनएसजी का मेंबर बनाया जा सकता है। मैरियानो एनएसजी के वर्तमान चेयरमैन सोंग यंग वान की तरफ से काम कर रहे हैं। ऐसे में उनके इस डॉक्यूमेंट को आधिकारिक दर्जा दिया गया है।
तो इसलिए भारत को मिलेगी एंट्री
दरअसल मैरियानो ने एक प्रस्ताव दिया था जिसके तहत यह साफ करने की कोशिश की गई थी कि एनपीटी में पाक के शामिल होने के रास्ते में भारत रुकावट न बने। इस प्रस्ताव में बताया गया कि कैसे भारत जैसे नॉन-एनपीटी मेंबर इस बात पर सहमत हो सकते हैं कि वह दूसरे नॉन-एनपीटी देश के रास्ते में बाधा नहीं बनेंगे। एसीए के एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर डैरेल किम्बॉल के मुताबिक मैरियानो ने जो फॉर्मूला दिया है उसमें पाक को बाहर रखने की कई वजहें हैं। डॉक्यूमेंट केमुताबिक भारत को भी पाक की ही तरह उन मानदंडो को पूरा करना होगा लेकिन एनएसजी मेंबर देशों के साथ सिविल न्यूक्लियर ट्रेड के लिए उसे अलग से एनएसजी की छूट हासिल करनी होगी। आपको बता दें कि एनएसजी का मेंबर बनने के लिए एनपीटी पर साइन करना जरूरी होता है। भारत, पाक और इजरायल तीनों ने ही इसे साइन नहीं किया है। चीन समेत कई देश इस वजह से एनएसजी में भारत की एंट्री का विरोध कर चुके हैं। किम्बॉल के मुताबिक जो फॉर्मूला मैरियानो ने दिया है उसके आधार पर भारत को एंट्री मिल सकती है लेकिन पाक को बाहर रहना पड़ सकता है। गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और उनका प्रशासन एनएसजी में भारत की एंट्री का बड़े पैमाने पर समर्थन कर चुका है। ओबामा ने तो वादा भी किया था कि भारत एनएसजी का सदस्य बनेगा।












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