अफगानिस्तान में घुस चुकी है भारतीय RAW, पाकिस्तानी सेना ने शाहबाज शरीफ से ऐसा क्यों कहा?
इस्लामाबाद, 06 जुलाई: पाकिस्तान में जारी सियासी उठापटके के बीच जनरल कमर जावेद बाजवा ने नई चाल चली है। जनरल बाजवा और आईएसआई चीफ ने भारत की खुफिया एजेंसी RAW का नाम लेकर अपने ही प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को डराने में लग गए हैं। पाकिस्तानी सेना ने संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा पर आयोजित बैठक में कहा कि भारतीय रॉ अब एक बार फिर से अफगानिस्तान में अपनी पकड़ मजबूत कर रही है, ऐसे में पाकिस्तान को तहरीक ए तालिबान से बातचीत का रास्ता अपनाना चाहिए।

टीटीपी के निशाने पर पाकिस्तानी सेना
पाकिस्तान में हुए कई भीषण आतंकवादी हमलों के लिए तहरीक ए तालिबान को जिम्मेदार माना जा रहा है। तहरीक ए तालिबान के निशाने पर पाकिस्तानी सेना रहती है। तहरीक ए तालिबान के आतंकी पाकिस्तान में हमले कर सीमा पार कर अफगानिस्तान भाग जाते हैं। इस कारण पाकिस्तान के लिए तहरीक ए तालिबान के आतंकियों को पकड़ना बेहद मुश्किल साबित हो रहा है। पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में घुसकर कई बार सैन्य कार्रवाई भी की है, लेकिन अब तालिबान के विरोध के बाद यह अभियान धीमा पड़ गया है।

सांसदों ने किया शांति समझौते का समर्थन
पाकिस्तान में मंगलवार को राष्ट्रीय सुरक्षा समिति की बैठक हुई जिसमें सांसदों ने तहरीक ए तालिबान के साथ शांति समझौते का औपचारिक समर्थन किया। जबकि इससे पहले लगातार पाकिस्तान सरकार तहरीक ए तालिबान के साथ मध्यस्थता करने से साफ इंकार कर रही थी। पाकिस्तान की ओर से इस बातचीत का नेतृत्व आईएसआई के वर्तमान चीफ नदीम अंजुम और आईएसआई के पूर्व प्रमुख और पेशावर के कोर कमांडर फैज हामिद कर रहे हैं। फैज हामिद ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, सांसदों और नेताओं को पूरे घटनाक्रम के बारे में बताया।

सेना ने शाहबाज शरीफ को डराया
पाकिस्तानी सेना ने पीएम शहबाज शरीफ और सांसदों को बताया कि उन्हें डर है कि तहरीक ए तालिबान के आतंकी इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रांत के आतंकियों के साथ हाथ मिला सकते हैं। यही वजह है कि पाकिस्तान इस आतंकी समूह के साथ शांति समझौता चाहता है। फैज हामिद ने कहा कि अगर तहरीक ए तालिबान इस्लामिक स्टे खुरासान प्रांत से हाथ मिलाता है तो यह पाकिस्तान की सुरक्षा के लिए बहुत खतरनाक होगा। भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ जरूर इस स्थिति का फायदा उठाने की कोशिश करेगी।

आंतकी गुटों से बातचीत जरूरी
पाकिस्तानी सेना ने संसदीय समिति को यह भी बताया कि भारत की खुफिया एजेंसी रॉ एक बार फिर से अफगानिस्तान में अपने पैर पसारने की कोशिश कर रही है। इसलिए पाकिस्तान के लिए यह जरूरी है कि वह आतंकी गुटों से बातचीत करे। इस बैठक में पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान शामिल नहीं थे। इस दौरान जनरल फैज और जनरल बाजवा ने सांसदों और मंत्रियों की ओर से पूछे गए सवालों का जवाब दिया।

फाटा को लेकर है विवाद
इससे पहले पाकिस्तान और आतंकवादी संगठन तहरीक-ए-तालिबान के बीच हुआ शांति समझौता खतरे में पड़ गया था। दरअसल, पाकिस्तान सरकार ने फाटा के खैबर पख्तूनख्वा में विलय वाली योजना से पीछे हटने से इनकार कर दिया था। फाटा (FATA) का पूरा नाम फेडरल एडमिनिस्ट्रेटेड ट्राइबल एरियाज है। यह एक जनजाति इलाका है, जिसका सीधा नियंत्रण पाकिस्तान की केंद्रीय सरकार के हाथ में होता है।

अफगानिस्तान से सटा है फाटा
फाटा की सीमा अफगानिस्तान से लगी हुई है। यह पूरा इलाका पहाड़ों और घने जंगलों से घिरा हुआ है। इस कारण यह आतंकवादियों के लिए सुरक्षित पनाहगार है। यह वहीं इलाका है, जहां अवैध हथियारों की मंडी लगती है और दुकानों में सब्जियों की तरह बंदूकें बेची जाती है। फाटा तहरीक ए तालिबान का पसंदीदा इलाका है। अगर यह खैबर पख्तूनख्वा राज्य के नियंत्रण में जाता है तो इसको मिलने वाली विशेष सहूलियतें बंद हो जाएंगी।












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