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Pakistan Water Crisis: सिंध प्रांत में पानी के लिए बवाल बना भयंकर, समझें फसाद की पूरी कहानी

Pakistan Water Crisis: भारत को हेकड़ी दिखाने वाले पाकिस्तान की असल हालत दुनिया के सामने है। आईएमएफ से मिले कर्ज और चीन की मदद के दम पर जैसे-तैसे देश की गाड़ी खिंच रही है। इधर अब पाकिस्तान में जल संकट को लेकर राजनीति से लेकर सड़क तक संग्राम छिड़ गया है। पाकिस्तान के सिंध प्रांत में पानी के लिए हिंसक विरोध का दौर चल रहा है। प्रदर्शनकारी नहर परियोजना का विरोध कर रहे हैं और पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़प की कई घटनाएं हो चुकी हैं। जानें इस फसाद की जड़ कहां है और कैसे यह बवाल इतना बढ़ गया।

सिंध प्रांत में पानी संकट को लेकर क्यों हो रहा बवाल

सिंध प्रांत में पानी को लेकर चल रहे टकराव में प्रदेश और केंद्र सरकार आमने-सामने है। सिंध प्रांत पीपीपी का गढ़ माना जाता है। शहबाज शरीफ सरकार के विरोध में पीपीपी के कार्यकर्ता जमकर प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने गृहमंत्री का घर फूंक दिया है। शहबाज शरीफ सरकार की योजना है कि सिंधु नदी पर 6 नहर बनाकर चोलिस्तान रेगिस्तान की सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया जाए।

Pakistan Water Crisis

211.4 अरब रुपए के चोलिस्तान कैनल सिस्टम का विरोध सिंध के लोग कर रहे हैं। सिंध के स्थानीय नागरिकों का कहना है कि शहबाज शरीफ पहले से ही गंभीर जल संकट का सामना कर रहे सिंध प्रांत का पानी पंजाब के पूर्वी हिस्से की बंजर जमीन को देने के लिए करना चाहते हैं। इसके विरोध में हजारों की संख्या में लोग प्रदर्शन कर रहे हैं।

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पाकिस्तान की राजनीति में भी चोलिस्तान कैनल योजना पर भूचाल

सिंध प्रांत में नहर बनने को लेकर पाकिस्तान की राजनीति में भी भूचाल आ गया है। सिंध प्रांत बेनजीर भुट्टो परिवार का गढ़ माना जाता है। इस प्रांत में अभी भी पीपीपी (PPP) की ही सरकार है। दूसरी ओर केंद्र में शहबाज शरीफ की सरकार है। सिंध में हो रहे विरोध-प्रदर्शन की अगुवाई पीपीपी कर रही है। पीपीपी के समर्थन से ही शहबाज शरीफ सरकार चल रही है, लेकिन प्रांत में केंद्र सरकार के विरोध में जुटे हुए हैं। बिलावल भुट्टो ने तो इसे पानी नहीं जीवन और सिंध के आत्मसम्मान का संघर्ष करार दिया है।

सिंध में पानी संकट का दशकों पुराना इतिहास

पाकिस्तान के सिंध प्रांत में पानी का संकट आज का नहीं बल्कि दशकों पुराना है। पाकिस्तान की सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक, 1999 से 2024 के बीच में सिंध में औसतन 40% तक जल संकट रहा है। जल संकट की वजह से इस प्रदेश में भारी कृषि संकट भी पैदा हो गया है और यहां के आम बागान भी सूखने की कगार पर है। इसके अलावा समुद्री जल के अतिक्रमण, कम बारिश और बदलती भौगोलिक परिस्थितियों की वजह से कृषि भूमि प्रभावित हो रही है। सिंध ही नहीं पाकिस्तान के दूसरे हिस्सों में भी जल संकट दिन-ब-दिन गंभीर होता जा रहा है। सिंध में पानी संकट को देखते हुए पीपीपी (पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी) ने लरकाना से ठट्टा तक कई रैलियों का आयोजन किया है।

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