Bangalore Metro Phase 3 को मिला बड़ा बूस्‍ट, डबल-डेकर फ्लाईओवर प्रोजेक्‍ट जल्‍द होगा शुरू

Bangalore Metro Phase 3: बेंगलुरु के सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क को मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठने जा रहा है। नम्मा मेट्रो के तीसरे चरण के तहत प्रस्तावित डबल-डेकर फ्लाईओवर-सह-मेट्रो कॉरिडोर को केंद्र सरकार से जल्द अंतिम मंजूरी मिलने की संभावना है। केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल खट्टर और कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के बीच हुई हालिया बैठक के बाद परियोजना को लेकर सकारात्मक संकेत मिले हैं। इससे आउटर रिंग रोड (ORR) पर लंबे समय से अटके निर्माण कार्य का रास्ता साफ होता दिखाई दे रहा है।

डबल-डेकर डिजाइन पर क्यों हुई थी देरी?

दरअसल, सितंबर 2024 में केंद्र ने नम्मा मेट्रो फेज-3 को सैद्धांतिक मंजूरी दी थी, लेकिन उसमें डबल-डेकर फ्लाईओवर का हिस्सा शामिल नहीं था। बाद में कर्नाटक सरकार ने बढ़ती यातायात जरूरतों और भविष्य में भूमि अधिग्रहण की लागत को देखते हुए योजना में बदलाव किया और इसके लिए अतिरिक्त 9,700 करोड़ रुपये का प्रावधान किया।

Bangalore Metro Phase 3

केंद्र सरकार को आशंका थी कि मेट्रो के साथ फ्लाईओवर बनने से लोग सार्वजनिक परिवहन के बजाय निजी वाहनों का ज्यादा उपयोग कर सकते हैं, जिससे मेट्रो की संभावित सवारी संख्या प्रभावित होगी। इसी वजह से परियोजना के सामाजिक और आर्थिक प्रभाव का दोबारा अध्ययन कराया गया।

कैसे दूर हुई समस्‍याएं?

बेंगलुरु मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BMRCL) ने इस स्‍टडी के लिए राइट्स लिमिटेड को नियुक्त किया। नई रिपोर्ट में पाया गया कि डबल-डेकर मॉडल का इकोनॉमिक इंटरनल रेट ऑफ रिटर्न (EIRR) करीब 15.9 प्रतिशत रहेगा। यह आंकड़ा मूल योजना के 17.04 प्रतिशत से थोड़ा कम जरूर है, लेकिन सार्वजनिक परिवहन परियोजनाओं के लिए निर्धारित 14 प्रतिशत के न्यूनतम मानक से काफी बेहतर है।

रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया कि ये प्रोजेक्‍ट आर्थिक रूप से सही होने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण, ईंधन बचत और ट्रैफिक मैनेजमेंट के लिहाज से भी बेहद फायदेमंद साबित होगी। इसके बाद केंद्र की अधिकांश आपत्तियां दूर हो गई हैं।

44.65 किलोमीटर लंबा होगा फेज-3 नेटवर्क

नम्मा मेट्रो फेज-3 के तहत कुल 44.65 किलोमीटर लंबा नेटवर्क डेवलेप किया जाएगा। पहला और सबसे बड़ा कॉरिडोर जेपी नगर चौथे फेज से केम्पापुरा तक 32.5 किलोमीटर लंबा होगा। यही कॉरिडोर भविष्य में ऑरेंज लाइन के नाम से जाना जाएगा। दूसरा कॉरिडोर होसाहल्ली से कडाबागेरे तक 12.15 किलोमीटर लंबा होगा।

इन दोनों मार्गों के शुरू होने से आउटर रिंग रोड, पीण्या औद्योगिक क्षेत्र और आईटी कॉरिडोर से जुड़े लाखों लोगों को राहत मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि डबल-डेकर संरचना लागू होने के बाद इस क्षेत्र में यातायात का दबाव काफी हद तक कम हो सकता है।

बेंगलुरु को मिलेगी नई रफ्तार

डबल-डेकर व्यवस्था में सबसे नीचे सामान्य सड़क, उसके ऊपर फ्लाईओवर और सबसे ऊपरी स्तर पर मेट्रो ट्रैक होगा। मुंबई और नागपुर जैसे शहरों में अपनाए गए इस मॉडल को सीमित शहरी क्षेत्र में अधिकतम परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने का प्रभावी तरीका माना जाता है। अब केंद्र से अंतिम औपचारिक मंजूरी मिलते ही बीएमआरसीएल टेंडर और निर्माण प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगा। यह परियोजना न केवल बेंगलुरु की ट्रैफिक समस्या को कम करेगी, बल्कि शहर के बुनियादी ढांचे को भी एक नया और आधुनिक स्वरूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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