पाक में ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद घबराहट, पीएम शरीफ ने भेजा बधाई संदेश
पाकिस्तान के राष्ट्रपति नवाज शरीफ ने भेजी अमेरिका के नए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अपनी शुभकामनाएं। लेकिन विशेषज्ञ कह रहे ट्रंप का राष्ट्रपति बनना चिंता का विषय।
इस्लामाबाद। रिपब्लिकन डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के ऐसे रिपब्लिकन राष्ट्रपति साबित हो सकते हैं, जिनकी नीतियों से पाकिस्तान को खासा नुकसान हो सकता है। बुधवार को जैसे ही ट्रंप के राष्ट्रपति चुने जाने की खबरें आईं पाक के विदेश मामलों के विशेषज्ञों में घबराहट की स्थिति पैदा हो गई।

क्या कहा पीएम शरीफ ने
इन सबसे अलग प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने नए राष्ट्रपति को जीत के बाद अपनी शुभकामनाएं भेज दीं।
पीएम नवाज ने अपने संदेश में कहा, 'पाकिस्तान की सरकार और यहां के लोगों की ओर से मैं आपको और अमेरिका के लोगों को आपको देश का 45वां राष्ट्रपति चुने जाने पर बधाई देता हूं।'
नवाज ने अपने संदेश में कहा कि ट्रंप की जीत निश्चित तौर पर अमेरिका के लोगों के लोकतंत्र, आजादी और मानवाधिकारों पर उनके विश्वास की जीत है।
लेकिन विशेषज्ञों में डर
वहीं ट्रंप के राष्ट्रपति चुने जाने के बाद पाकिस्तान में विदेश नीति के विशेषज्ञ हैरान हैं। उनका मानना है कि ट्रंप के चुनाव के बाद अमेरिकी नीति भारत का परमाणु हथियारों के मुद्दे पर समर्थन करेगी।
पाकिस्तान और अमेरिका हमेशा से मजबूत साझीदार रहे हैं। लेकिन 9/11 के बाद दोनों के रिश्तों में काफी तनाव आ गया। अमेरिका ने हर बार पाक पर आरोप लगाया कि वह इस्लामिक आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है।
भारत के साथ ही भी अब रिश्ते उरी आतंकी हमले के बाद खराब हो चले हैं। पाक में कई नागरिक ट्रंप के मुसलमान विरोधी बयानों से परेशान हैं।
ट्रंप यह कह चुके हैं कि मुसलमानों को अमेरिका में दाखिल होने से रोकना चाहिए। अब पाक विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका के व्यापारिक और रणनीतिक रिश्ते भारत की ओर बड़े पैमाने पर मुड़ सकते हैं।
भारत के करीब होगा अमेरिका
लाहौर में विदेश नीति के विश्लेषक हसन अस्कारी रिजवी कहते हैं कि अमेरिका, पाक को पूरी तरह त्याग नहीं पाएगा लेकिन हिलेरी क्लिंटन के मुकाबले ट्रंप पाक के लिए काफी सख्त राष्ट्रपति साबित होंगे।
वह कहते हैं कि पाक की जगह भारत के रिश्ते अमेरिका से और बेहतर होंगे। ट्रंप ने अभी साउथ एशिया के लिए अपनी नीति को खुलासा नहीं किया है।
हाल में ही में उन्होंने कश्मीर मुद्दे पर भारत और पाक के बीच मध्यस्थता करने का प्रस्ताव दिया था।
मई में फॉक्स न्यूज के साथ एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि वह अफगानिस्तान में 10,000 सैनिकों को रखने का समर्थन करते हैं क्योंकि यह उस पाक से सटा हुआ है जहां पर परमाणु हथियार मौजूद हैं।
वाइल्ड कार्ड की तरह ट्रंप
वहीं कराची में अमेरिकी काउंसल जनरल ने जियो न्यूज को बताया कि अमेरिका की नीति राष्ट्रीय हितों से जुड़ी होती है और यह सरकार के बदलने पर नहीं बदलती है। ट्रंप के चुनावी अभियान ने पाक को ताक पर रख दिया था।
पाक सांसद और अमेरिका में पाक की पूर्व राजदूत शेरी रहमान ने कहा है कि ट्रंप एक तरह से वाइल्ड कार्ड की तरह हैं।












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