पाकिस्तान के पूर्व राजदूत ने सीपीईसी को अमेरिका और चीन के लिए भी चुनौतीपूर्ण बताया
अमेरिका में पाकिस्तान के पूर्व राजदूत हुसैन हक्कानी ने ग्वादर पोर्ट पर कही अहम बात। कहा सिर्फ भारत ही नहीं अमेरिका और ईरान के लिए भी होगा चुनौती।
वॉशिंगटन। अमेरिका में पाकिस्तान के पूर्व राजदूत रहे हुसैन हक्कानी ने एक बार फिर पाकिस्तान पर निशाना साधा है। इस बार उन्होंने चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारे यानी सीपीईसी की वजह से पाक और चीन को आड़े हाथों लिया है। हक्कानी ने कहा है कि चन की ओर से 46 बिलियन डॉलर की लागत से सीपीईसी के तहत जो ग्वादर पोर्ट न सिर्फ भारत बल्कि अमेरिका, ईरान और बाकी खाड़ी क्षेत्र के लिए भी चुनौतीपूर्ण साबित होगा।

तेल की सप्लाई पर होगा असर
हक्कानी के मुताबिक अगर ग्वादर का मैनेजमेंट चीन के हाथों होगा और वहां पर चीन की सेना और नौसेना की मौजूदगी रही तो फिर इससे भारत के अलावा अमेरिका, ईरान और बाकी खाड़ी क्षेत्रों की भी दिक्कतें बढ़ेंगी। इससे खाड़ी, ईरान, अन्य देशों तथा अमेरिका तक को और ऑयल सप्लाई और खाड़ी देशों के साथ बाकी बिजनेस पर भी असर होगा। हक्कानी ने कहा कि ग्वादर को पाकिस्तान हमेशा से ही एक स्ट्रैटेजिक आर्मी स्टेशन समझता आया है। सीपीईसी दरअसल हाइवे, रेलवे और एनर्जी प्रोजेक्ट्स का एक नेटवर्क है जो दक्षिणी पाकिस्तान और ग्वादर पोर्ट को चीन के शिनजियांग उइगुर से जोड़ता है। यह पीओके से होकर गुजरता है इसलिए भारत ने इस परियोजना को लेकर आपत्ति जताई है। हक्कानी की मानें तो पाकिस्तान के पास बड़े नेवी स्टेशन के लिए संसाधन नहीं हैं।
कौन हैं हक्कानी
हुसैन हक्कानी हमेशा पाकिस्तान और इसकी नीतियों के खिलाफ बोलने वाले राजनयिक रहे हैं। हक्कानी ने पिछले वर्ष बलूचिस्तान को पाकिस्तान का सबसे जटिल हिस्सा है। उन्होंने कहा था कि इस हिस्से में इतने ज्यादा अशांत इलाके हैं जिन पर खुद पाक सरकार का ही नियंत्रण नहीं है। उन्होंने कहा कि पाक सेना की गलतियों का खामियाजा यहां के लोगों को भुगतना पड़ता है। हक्कानी वर्ष 2008 से 2011 तक अमेरिका में पाक के राजदूत रहे थे। हक्कानी कई बार कह चुके हैं कि बलूचिस्तान में कई संसाधन हैं लेकिन उनका लाभ ही वहां के लोगों को इन संसाधनों का कोई लाभ नहीं मिलता।












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