भारत के IIT को टक्कर देने के लिए पाकिस्तान ने खोला ITU, 9 साल बाद कैंपस बना बकरा मंडी

डॉ उमर सैफ, जो पाकिस्तान में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम के सलाहकार के रूप में भी काम कर रहे हैं, ने ट्विटर पर लिखा है कि कैसे एक कॉलेज परिसर के लिए चिह्नित साइट को "बकरा मंडी (बकरी बाजार)" में बदल दिया गया है।

इस्लामाबाद, 11 जुलाईः पाकिस्तान स्थित शिक्षाविद और सूचना प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (ITU), लाहौर के पूर्व कुलपति ने देश में शिक्षा प्रणाली की दयनीय स्थिति पर निराशा जताई है। डॉ उमर सैफ, जो पाकिस्तान में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम के सलाहकार के रूप में भी काम कर रहे हैं, ने ट्विटर पर लिखा है कि कैसे एक कॉलेज परिसर के लिए चिह्नित साइट को "बकरा मंडी (बकरी बाजार)" में बदल दिया गया है।

यूनिवर्सिटी बनाने का सपना हुआ बर्बाद

यूनिवर्सिटी बनाने का सपना हुआ बर्बाद

दरअसल पाकिस्तान ने साल 2013 में भारत के आईआईटी जैसे संस्थानों को टक्कर देने के लिए एक छोटा MIT बनाने का सपना देखा था। लेकिन उनका ये सपना आज बुरी तरह बर्बाद हो चुका है। इस बर्बादी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पाकिस्तानियों ने उस जगह जहां छोटे MIT यानी ITU (इन्फॉर्मेशन टेक्नॉलजी इंस्टिट्यूट) का निर्माण होना था, वहां बकरा मंडी खोल ली है। यहां पशुपालक अपने बकरे को बांधते हैं और बाकी खाली जगह पर लोग अपनी मोटरसाइकिल पार्क करते हैं।

ट्विटर पर साझा की तस्वीर

इस बात की जानकारी इनफॉर्मेशन टेक्नॉलजी यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति उमर सैफ ने दी। उन्होंने देश के शिक्षा तंत्र पर हताशा जताते हुए उस जगह की तस्वीर साझा की है जहां MIT तैयार करने का निर्णय लिया गया था। अब ये जगह बकरा मंडी है इसके अलावा यहां गाड़ियों की पार्किंग भी की जाती है। उमर सैफ ने अपने ट्वीट में बताया, "साल 2013 में हम लोग पाकिस्तान के लिए एक छोटा MIT बनाने के लिए बिलकुल तैयार थे। उसमें वो सारी चीज होतीं जो भारत के आईआईटी में हैं लेकिन आज वो जगह जिसे हमने इस यूनिवर्सिटी के निर्माण के लिए चुना था वो बकरा मंडी बन गई है।"

पाकिस्तानियों की सोच के कारण नहीं बना ITU

पाकिस्तानियों की सोच के कारण नहीं बना ITU

अपने ट्वीट के साथ उन्होंने पाकिस्तान की एक बेवसाइट दैनिक ट्रिब्यून की खबर भी शेयर किया है। इसमें उन्होंने बताया है कि कितनी शिद्दत से उन्होंने कोशिश की थी, कि पाकिस्तान में मैसाचुसेट्स प्रौद्योगिकी संस्थान (MIT) जैसा संस्थान बने। इसे उन्होंने 'MIT फॉर पाकिस्तान' का नाम भी दिया था। उनका मकसद था कि पाकिस्तान में विज्ञान, तकनीक और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में एडवांस इनोवेशन और रिसर्च हों। हालांकि पाकिस्तानियों की सोच के चलते ये संभव नहीं हो पाया।

2005 में शुरू किया प्रयास

2005 में शुरू किया प्रयास

इस खबर में उन्होंने लिखा है कि पाकिस्तान में एक विश्वस्तरीय संस्थान बनाने की कोशिश उन्होंने 2005 से शुरू की लेकिन उनके आइडिया पर किसी ने ध्यान नहीं दिया। उन्होंने बताया कि उन्होंने इस काम के लिए राजनेताओ से लेकर यूनिवर्सिटी के प्रशासकों को पत्र लिखा था, मगर कुछ काम नहीं आया। उन्हें बदले में ऐसी टिप्पणियाँ सुनने को मिली जिससे उनका हौसला पस्त हो गया। इन टिप्पणियों में एक थी 'पाकिस्तान को अब ज्यादा पीएचडी लोग नहीं चाहिए', दूसरी थी- 'MIT हमारी जूती-पाकिस्तान महान'।

लोगों में शिक्षा के स्तर को लेकर नहीं थी चिंता

लोगों में शिक्षा के स्तर को लेकर नहीं थी चिंता

इसके अलावा पाकिस्तान के लिए सुनहरे भविष्य का सपना देखने वाले उमर सैफ से ये तक पूछा गया कि आखिर वो पाकिस्तान के शैक्षणिक व्यवस्था के बारे में जानते ही क्या हैं जिसे सुन वो समझ गए कि पाकिस्तान में लोग शिक्षा को लेकर कितने जागरूक हैं। उन्होंने यह भी लिखा कि दुनिया के 700 विश्वविद्यालयों में पाकिस्तान के एक भी यूनिवर्सिटी को जगह न मिलने से लोग निराश होने का दिखावा कर रहे थे। इस बीच साल 2011 में उन्हें दुनिया के शीर्ष 35 इनोवेटर्स में जगह मिली।

शाहबाज शरीफ ने दिया था न्यौता

शाहबाज शरीफ ने दिया था न्यौता

यह पहली बार था जब किसी पाकिस्तानी को यह मुकाम हासिल हुआ। पूरे पाकिस्तान में सैफ का नाम छा गया। सैफ की प्रसिद्धि को देखते हुए पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री और वर्तमान में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ ने उन्हें नाश्ते पर बुलाया और पंजाब सरकार के लिए काम करने को कहा। इसके साथ ही सैफ को विश्वस्तरीय आईटी यूनीवर्सिटी स्थापित करने की बात भी कही। इसके बाद सैफ काम पर लग गए और 2 सालों की कड़ी मेहनत के बाद ITU अस्तित्व में आया।

सैफ की मेहनत हुई बेकार

सैफ की मेहनत हुई बेकार

हालांकि 9 साल बीतने के बाद सैफ को समझ आ गया है कि उनकी मेहनत बेकार जा चुकी है। सैफ MIT में पूर्व लेक्चरर रह चुके हैं और पाकिस्तान में यूनाइटिड नेशन डेवलपमेंट प्रोग्राम में सलाकार के तौर पर भी नियुक्त हैं। उन्होंने बहुत कोशिश की कि वह पाकिस्तान को ऐसी एक यूनिवर्सिटी देकर विकास की ओर ले जाएँ लेकिन उन्हें ये देख बहुत हैरानी हुई कि पाकिस्तान में उच्च शिक्षा प्रणाली को लेकर हर कोई सिर्फ चिंतित होने का दिखावा कर रहा था।

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