पाकिस्तानी मिलिट्री ने कहा, करतारपुर साहिब के लिए जरूरी है पासपोर्ट, पीएम इमरान ने दी थी छूट
इस्लामाबाद। करतारपुर साहिब कॉरिडोर की ओपनिंग के 48 घंटे पहले ही पाकिस्तान ने पासपोर्ट मसले पर यू-टर्न ले लिया है। पाकिस्तान आर्मी की तरफ से कहा गया है कि जो भी श्रद्धालु दर्शन के लिए आ रहे हैं, उनके पास पासपोर्ट होना जरूरी है। इससे पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने ऐलान किया था कि श्रद्धालुओं को दर्शन के लिए पासपोर्ट की जरूरत नहीं है। भारतीय एजेंसियों की तरफ से इमरान के ऐलान को एक झांसे के तौर पर देखा गया था।

पासपोर्ट आधारित पहचान प्रक्रिया
पाकिस्तान मीडिया ने मेजर जनरल आसिफ गफूर के हवाले से बताया है कि जो भी श्रद्धालु करतारपुर साहिब आ रहे हैं उन्हें पासपोर्ट आधारित पहचान प्रक्रिया से ही गुजरना होगा। यानी श्रद्धालुओं को पासपोर्ट की जरूरत पड़ेगी। मेजर जनरल आसिफ गफूर पाकिस्तान मिलिट्री के आधिकारिक प्रवक्ता हैं। इमरान खान ने पिछले हफ्ते कहा था कि उन्हें करतारपुर साहिब आने वाले तीर्थयात्रियों के लिए राहत की दो खबरों के बारे में बताते हुए खुशी हो रही है। इमरान ने ट्विटर पर लिखा, 'भारत से करतारपुर आने वाले सिखों के लिए मैंनें दो शर्तों में ढील दी हैं। उन्हें अब पासपोर्ट की जगह सिर्फ एक वैध आईडी की जरूरत होगी। साथ ही उन्हें अब 10 दिन पहले एडवांस में बुकिंग कराने की जरूरत नहीं होगी। इसके साथ ही गुरुजी के 550वीं जन्मतिथि पर और कॉरिडोर के उद्घाटन पर किसी भी तरह का शुल्क नहीं लिया जाएगा।'
पाक की वजह से कनफ्यूज्ड श्रद्धालु
भारतीय श्रद्धालु बिना पासपोट करतारपुर नहीं जा पाएंगे, इसकी आधिकारिक पुष्टि हो गई है।पासपोर्ट के मसले पर पिछले कुछ दिनों से श्रद्धालुओं के बीच एक तरह की कनफ्यूजन की स्थिति थी। सुरक्षा एजेंसियों के कान पाक पीएम इमरान की ओर से आखिरी मौके पर आई पासपोर्ट में छूट के ऐलान पर खड़े हो गए हैं। एजेंसियों की मानें तो इस छूट के पीछे पंजाब में आतंकवाद को फिर से जिंदा करना एकमात्र मकसद है। अधिकारियों की मानें तो पाकिस्तान की ओर से अचानक हृदय परिवर्तन की वजह सिखों में अपने लिए एक झूठी इमेज का निर्माण करना है।












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