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मंदिर जलाने के 350 आरोपियों से मुकदमा वापस लेगी पाकिस्तान सरकार, हिंदुओं के बारे ये कहा

पेशावर, 13 जुलाई: पाकिस्तान की खैबर पख्तूनख्वा सरकार ने मंगलवार को कहा है कि वह मंदिर जलाने की घटना के 350 आरोपियों पर से मुकदमा वापस ले लेगी। यह घटना पिछले साल हुई थी। वहां की सरकार का दावा है कि हिंदू समुदाय ने सभी आरोपियों को माफ करने की बात कह दी है। जबकि, पाकिस्तान के मानवाधिकार कार्यकर्ता को सरकार के दावे में झोल नजर आ रहा है। गौरतलब है कि इस घटना के बाद पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट ने खुद से संज्ञान लेकर फौरन मंदिर के पुननिर्माण का आदेश दिया था। लेकिन, अब पाकिस्तानी सरकार स्थानीय बुजुर्गों की एक अनौपचारिक संस्था के जरिए इस मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की है।

मामले को शांतिपूर्वक सुलझा लेने का दावा

मामले को शांतिपूर्वक सुलझा लेने का दावा

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के आंतरिक विभाग के सूत्रों के मुताबिक उसने मंदिर जलाने वाले 350 आरोपों से आपराधिक मुकदमा वापस लेने की तैयारी इसलिए शुरू की है, क्योंकि हिंदुओं ने उन्हें माफ कर दिया है। वहां की सरकार का दावा है कि उसने इस मामले को सुलझाने के लिए जिरगा गठित की थी, जिसमें हिंदू समुदाय के सदस्यों ने आरोपियों को माफ करने का फैसला किया है। जिरगा वहां के बुजुर्गों की एक सभा होती है, जिसमें कथित रूप से आम सहमति से फैसला लिया जाता है। पाकिस्तानी हुक्कमरानों के मुताबिक उस घटना की वजह से स्थानीय मुसलमानों और हिंदुओं में तनाव पैदा हुआ था, लेकिन उसने जिरगा गठित करके सभी मसलों कौ सौहार्दपूर्ण तरीके से सुलझा लिया है।

मानवाधिकार कार्यकर्ता ने दावे पर उठाए सवाल

मानवाधिकार कार्यकर्ता ने दावे पर उठाए सवाल

हालांकि, हिंदुओं ने कहा है कि पाकिस्तानी सरकार के आश्वासन के बावजूद, मंदिर से सटे एक विश्राम क्षेत्र के निर्माण में बेवजह की देरी हो रही है, जिससे अल्पसंख्यकों में अशांति पैदा हो रही है। वहीं वहां के हिंदू-अल्पसंख्यकों के धार्मिक मामलों के जानकार और मानवाधिकार कार्यकर्ता हारून सरब दियाल ने कहा है कि, 'हम शांति और दो धर्मों के सद्भाव के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन मामलों को वापस लेने के लिए जो तरीका अपनाया गया है, वो इस धरती की जिरगा संस्कृति के खिलाफ है।' उनकी शिकायत है कि इसके लिए स्थानीय हिंदू समुदाय को भरोसे में नहीं लिया गया। सिर्फ नेशनल असेंबली के पाकिस्तान तहरीक ए इंसाफ के सदस्य और पाकिस्तान हिंदू काउंसिल के चेयरमैन डॉक्टर रमेश के वंकवानी को विश्वास में लिया गया।

पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट ने खुद से संज्ञान लिया था

पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट ने खुद से संज्ञान लिया था

सूत्रों का कहना है कि खैबर पख्तूनख्वा के आंतरिक विभाग ने इसके लिए एंटी-टेररिस्ट कोर्ट को आधिकारिक खत भी लिखा था। पिछले साल वहां पर तेरी करक जिले में महाराज प्रेम हंस की समाधि और पास के मंदिर को आग के हवाले कर दिया गया था। बवाल के बाद सरकार ने उसमें शामिल 350 लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज कराई थी। उस घटना में शामिल 109 लोगों को गिरफ्तार भी किया गया था और ड्यूटी पर मौजूद एसपी और डीएसपी समेत 92 पुलिस वालों को सस्पेंड कर दिया गया था। पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट ने इस घटना पर स्वत: संज्ञान लेते हुए प्रांतीय सरकार को समाधि और मंदिर के पुनर्निमाण का आदेश दिया था।

पाकिस्तान में बच गए सिर्फ 75 लाख हिंदू

पाकिस्तान में बच गए सिर्फ 75 लाख हिंदू

पाकिस्तान के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक अब वहां सिर्फ 75 लाख हिंदू बच गए हैं। वैसे पाकिस्तानी हिंदू अपनी तादाद 90 लाख से ज्यादा बताते हैं। अधिकतर हिंदू सिंध प्रांत में रहते हैं, लेकिन वहां पर उन्हें कट्टरपंथी ताकतों के उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है। अल्पसंख्यकों के धर्म स्थलों पर हमले और उनकी महिलाओं के साथ जबर्दस्ती की घटनाएं अक्सर सुनने में आती रही हैं। (तस्वीरें- सभी तस्वीरें फाइल और कुछ प्रतीकात्मक भी)

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