ओबामा ने किया किनारे तो पाक ने कहा नहीं रहा दोस्ती पर भरोसा
इस्लामाबाद। अमेरिका राष्ट्रपति बराक ओबामा ने 26 जनवरी 2015 को भारत आने के फैसले के साथ ही पाकिस्तान की यात्रा पर नवाज शरीफ के सामने सख्त लहजे में एक शर्त क्या रख दी, पाक के तो तेवर ही बदले से लगने लगे हैं।

पाक के रक्षा मंत्री का जो बयान आया है उससे तो कम से कम ऐसा ही लगता है। पाक के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा है कि अब अमेरिका की दोस्ती पर पाक को बिल्कुल भी भरोसा नहीं रहा है।
नुकसानदायक साबित हुई अमेरिका की नीति
ख्वाजा आसिफ ने बुधवार को यह बात साउथ एशिया और वेस्टर्न एशिया पर चर्चा के दौरान कही। उन्होंने कहा कि इन दोनों ही क्षेत्रों के लिए अमेरिका की फॉरेन पॉलिसी हमेशा से ही नुकसानदायक साबित हुई हैं।
आसिफ के मुताबिक यह सही है कि अमेरिका 1960 और 1970 के दशक से पाक को दोस्त रहा है लेकिन अब उसकी दोस्ती पर भरोसा नहीं किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि अमेरिका को लेकर पाक को बहुत सावधान रहना पड़ेगा क्योंकि पाक, अफगानिस्तान में हस्तक्षेप की कीमत अब चुका रहा है। उन्होंने कहा कि वर्ग और सम्प्रदाय के नाम पर इस क्षेत्र के बिखराव की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
उन्होंने आतंकवाद के विरूद्ध अभियान में पाकिस्तान के योगदान पर अमेरिका की निराशा को गलत बताया। उन्होंने कहा कि इस संघर्ष में हमारे योगदान के बावजूद वह निराशा व्यक्त कर रहा है। उन्होंने पश्चिम एशिया और दक्षिण एशिया की वर्तमान समस्याओं के लिए अमेरिका की विदेश नीति को जिम्मेदार ठहराया।
भारत के साथ शांति की बात
पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ने भारत का उल्लेखकर कहा कि हमारे पूर्व के पड़ोसी ने शांति की हमारी पहल को गलत अर्थ में लिया है लेकिन इस देश के साथ हमारी समस्याएं शांति और समझौता वार्ता के माध्यम से ही हल की जा सकती है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नवाज शरीफ जब सत्ता में आए थे तब उन्होंने भारत के साथ मिलकर काम करने का संकल्प किया था। शुरूआत में इस दिशा में प्रयास हुए और अच्छी प्रगति हुई किन्तु पिछले कुछ महीनों से सीमा पर स्थिति बिगड़ी है।
उन्होंने हाल में नई दिल्ली में पाकिस्तानी राजनयिक की कश्मीरी नेताओं से भेंट पर भारत की प्रतिक्रिया का उल्लेख कर कहा कि भारत ने इसे बहुत अधिक महत्व दे दिया जिससे स्थिति बिगड़ी और दोनों देशों की सचिव स्तर की बैठक स्थगित की गई।
इससे दोनों देशों को नुकसान हुआ और शांति प्रक्रिया को आघात पहुंचा। लेकिन हम इसके बावजूद शांति प्रयास करेंगे और हमें विश्वास है कि भारत स्थाई शांति और मित्रता कायम करने की प्रक्रिया को शुरू करेगा।












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