PoK के राष्ट्रपति सरदार मसूद खान के बगल में मिली सिद्धू को सीट, पाकिस्तान की वजह से देश में होंगे शर्मसार!
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इस्लामाबाद। पाकिस्तान में नए वजीर-ए-आजम इमरान खान के शपथ ग्रहण के साथ ही भारत में एक नया विवाद पैदा हो गया है। यहां पर पाकिस्तान की सरकार ने पंजाब की कांग्रेस सरकार में मंत्री और पूर्व क्रिकेटर रहे नवजोत सिंह सिद्धू को पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर यानी पीओके के राष्ट्रपति सरदार मसूद खान के बगल में सीट दी थी। विशेषज्ञों की मानें तो ऐसा करके पाकिस्तान की सरकार ने प्रोटोकॉल को तोड़ा है और सिद्धू के लिए पशोपेश वाली स्थिति पैदा कर दी है। हालांकि यहां पर सिद्धू ने पाकिस्तान के आर्मी चीफ जनरल कमर जावेद बाजवा को भी गले लगाया है। कुछ लोग सिद्धू के इस कृत्य की आलोचना कर रहे हैं। ये भी पढ़ें-नवजोत सिंह सिद्धू ने लगाया पाकिस्तान आर्मी चीफ जनरल कमर जावेद बाजवा को गले

पाकिस्तान ने तोड़ा प्रोटोकॉल
विदेश नीति के जानकारों के मुताबिक पाक सरकार को सिद्धू को विदेशी मेहमानों के साथ बैठाना चाहिए था न कि मसूद खान के बगल में। उनका मानना है कि पीओके, भारत का हिस्सा है और पाकिस्तान ने इस पर कब्जा करके रखा है। भारत, पीओके को कभी भी मान्यता नहीं देता है और ऐसा करके पाकिस्तान ने प्रोटोकॉल का अपमान किया है। सरदार मसूद खान पीओके के 27वें राष्ट्रपति हैं और पाक के जाने माने राजनयिक भी हैं।

कई पदों पर रहे हैं खान
सन् 1980 में खान ने पाकिस्तान विदेश सेवा का हिस्सा बने थे। इसके बाद अगस्त 2003 से मार्च 2005 तक उन्होंने पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के तौर पर काम किया। सितंबर 2008 से सितंबर 2012 तक वह चीन में पाकिस्तान के राजदूत के तौर पर तैनात थे। इसके बाद 11 अक्टूबर 2012 को उनकी नियुक्ति पाकिस्तान ने यूनाइटेड नेशंस में बतौर स्थायी राजदूत के तौर पर की थी। वह सात फरवरी 2015 तक इस पद पर थे। इसके अलावा मसूद खान ने फरवरी 2015 से चार अगस्त 2016 तक पाकिस्तान के इंस्टीट्यूट ऑफ स्ट्रैटेजिक स्टडीज के डायरेक्टर जनरल का पद संभाला था।

कांग्रेस ने दी प्रतिक्रिया
सिद्धू को पीओके के राष्ट्रपति के बगल में सीट मिलने पर जम्मू कश्मीर कांग्रेस की तरफ से प्रतिक्रिया आ गई है। राज्य के कांग्रेस चीफ गुलाम अहमद मीर ने इस पर कहा है कि सिद्धू एक जिम्मेदार व्यक्ति हैं। सिर्फ वही इस बात का जवाब दे सकते हैं लेकिन हां वह इस स्थिति से खुद को बचा सकते थे। शुक्रवार को सिद्धू ने लाहौर पहुंचने के बाद कहा, 'मैं यहां पर अपने दोस्त की खुशी में शरीक होने के लिए आया हूं।' सिद्धू की मानें तो वह पाकिस्तान एक राजनेता के तौर पर नहीं बल्कि एक दोस्त के तौर पर आए हैं। 54 वर्षीय सिद्धू को पाकिस्तान जाने पर सोशल मीडिया पर कड़ी आलोचना का भी सामना करना पड़ा है।
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