इंडियन आर्मी और इंटेलीजेंस से नहीं डरा लेकिन 'फैंटम' से डर गया हाफिज सईद
लाहौर। जो काम पिछले कई वर्षों से पाकिस्तान इंडियन आर्मी और इंटेलीजेंस एजेंसियां करने में लगी वह काम कबीर खान ने कर दिखाया। कबीर खान की एक फिल्म ने 50 लाख के ईनामी आतंकी हाफिज सईद को डरा दिया है। उसका डर इतना बढ़ गया कि उसने लाहौर हाई कोर्ट में कबीर खान की फिल्म 'फैंटम' की रिलीज को बैन करने की मांग कर डाली और इसे पाक में बैन कर दिया गया।

26/11 हमले का मास्टर माइंड और लश्कर-ए-तैयबा और जमात-उद-दावा का चीफ हाफिज नहीं चाहता था कि इस फिल्म को पाक में रिलीज किया जाए। उसका कहना था कि यह फिल्म भारत की ओर से पाक के खिलाफ किया जा रहा एक दुष्प्रचार है।
अमेरिका के 50 लाख के ईनामी आतंकी हाफिज सईद का कहना है कि फिल्म के जरिए उसके संगठन जेयूडी के खिलाफ भी एक गलत भावना का प्रचार किया जा रहा है। यह फिल्म मुंबई आतंकी हमलों पर आधारित है।
लाहौर हाई कोर्ट के जज जस्टिस शाहिद बिलाल हसन ने गुरुवार को यह आदेश पास किया कि 'फैंटम' को पाक में रिलीज न होने दिया जाए। सईद के वकील और सरकारी वकील की ओर से पेश किए गए तर्कों के बाद उन्होंने यह फैसला दिया।
28 अगस्त को रिलीज होने वाली इस फिल्म को बैन करने से पहले जज ने कहा कि यह बात सभी को मालूम है कि पाक में भारतीय फिल्मों की सीडी आसानी से उपलब्ध है। ऐसे में कोर्ट सरकार से सिर्फ फिल्म की रिलीज को बैन करने की मांग कर सकता है।
साथ ही वह सरकार से इस बाबत जवाब मांग सकते हैं कि वह इस फिल्म की सीडी को बाजार में उपलब्ध होने से रोकने के लिए जो कर सकती है वह करे।
जज के मुताबिक अगर फिल्म की रिलीज पर कोर्ट बैन लगाता है तो सरकार का दायित्व है कि वह सीडी को मार्केट में न आने दे।
आठ अगस्त को हाफिज सईद के वकील एके डोगर की ओर से दायर याचिका में कहा गया था कि फिल्म की रिलीज से सईद की जिंदगी पर खतरा पैदा हो जाएगा। फिल्म के डायलॉग पाक की जनता को सईद के खिलाफ भड़का सकते हैं। वह सर्इद को एक आतंकी मानने लगेगी।
सरकारी वकील ने कोर्ट में कहा कि फिल्म को लेकर सरकार ने एक एनओसी जारी की हुई है। ऐसे में यह याचिका एकदम बेकार है और इसे खारिज कर देना चाहिए। याचिकाकर्ता बेकार में सरकार को विवाद में शामिल करने की कोशिश कर रहा है। हालांकि अभी तक पाक सेंसर बोर्ड ने फिल्म को मंजूरी नहीं दी है।












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