Indus Water Treaty: सिंधु जल समझौता रद्द होने से पाकिस्तान में हाहाकार, अब किसानों की भी टेंशन बढ़ी
Indus Water Treaty: पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत के सिंधु जल समझौता रद्द किए जाने के बाद से पूरे पाकिस्तान में हाहाकार मचा हुआ है। पहले से ही सिंध प्रांत में पानी संकट की वजह से भारी प्रदर्शन हो रहा है। इसके बाद कमजोर मानसून की वजह से इस साल किसानों के लिए सिंचाई का संकट भी गहरा गया है। सिंधु जल समझौता रद्द होने की वजह से पाकिस्तान की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। पानी की कमी की वजह से कृषि संकट और खाद्यान्न की कमी से भी पड़ोसी देश को जूझना पड़ सकता है। पाकिस्तानी अधिकारियों ने आशंका जताई है कि चेनाब नदी से पानी का प्रवाह कम होता है, तो इसका असर कृषि समेत पूरे देश की अर्थव्यवस्था पर नजर आएगा।
Indus Water Treaty पाकिस्तान की राजनीति में बना बड़ा मुद्दा
पाकिस्तान की राजनीति में इस वक्त सिंधु जल समझौता बड़ा मुद्दा बन गया है। इमरान खान की पार्टी के सांसद सैयद अली जफर ने समझौता रद्द किए जाने पर इसे वॉटर बम बताते हुए कहा था कि इसका जल्द समाधान होना चाहिए। ऐसा नहीं होता है, तो भूखे मरने की नौबत आ सकती है। अब किसानों को भी सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिलने का डर सताने लगा है।

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पंजाब के कृषि और जल प्रबंधन महानिदेशक राणा तजमल हुसैन ने कहा कि अगर सिंधु समझौता रद्द करने के फैसले को तत्काल लागू किया जाता है, तो 15 से 20 फीसदी तक पानी का प्रवाह कम हो सकता है। पंजाब प्रांत का 80 फीसदी पानी चेनाब नदी से आता है और इससे पंजाब में सूखे का संकट बन जाएगा। कृषि संकट का सीधा असर पूरे देश की अर्थव्यवस्था पर भी नजर आएगा।
कृषि संकट का असर पूरे देश की अर्थव्यवस्था पर
पाकिस्तान में कृषि संकट का असर पूरे देश की अर्थव्यवस्था पर नजर आ सकता है। अगर खाद्यान्न में कमी होती है, तो स्वाभाविक तौर पर अनाज की कीमतें बढ़ेंगी। पाकिस्तान पहले से ही बेतहाशा महंगाई से बेहाल है। बिजली संकट की वजह से पड़ोसी देश में सिंचाई के लिए आज भी बड़ी निर्भरता मानसून और बारिश पर ही है। सिंधु जल समझौता पर भारत के सख्त रुख को देखकर शहबाज शरीफ सरकार की सिट्टी पिट्टी गुम होती दिख रही है। पाकिस्तान की सरकार के मंत्री ने पत्र लिखकर भारत को इस फैसले पर दोबारा विचार करने का आग्रह भी किया है। हालांकि, भारत की दो टूक राय है कि सीमा पार से जब तक आतंकवाद का समूल नाश नहीं होता है तब तक सिंधु जल समझौता निलंबित ही रहेगा।
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