खतरे में पाकिस्तान: FATF की ग्रे लिस्ट का मतलब, आलू-प्याज तक बेचने में बेलने पड़ेंगे पापड़!
फ्रांस की राजधानी पेरिस में फैसला किया गया है कि पाकिस्तान को 90 दिनों के लिए 'ग्रे लिस्ट' में शामिल करने का फैसला हुआ है। पेरिस में फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की मीटिंग में यह फैसला लिया गया। खास बात है कि इस फैसले में चीन ने अपने दोस्त पाकिस्तान का विरोध न करने का फैसला किया।
इस्लामाबाद। फ्रांस की राजधानी पेरिस में फैसला किया गया है कि पाकिस्तान को 90 दिनों के लिए 'ग्रे लिस्ट' में शामिल करने का फैसला हुआ है। पेरिस में फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की मीटिंग में यह फैसला लिया गया। खास बात है कि इस फैसले में चीन ने अपने दोस्त पाकिस्तान का विरोध न करने का फैसला किया और तब अगले तीन माह तक पाक पर नजर रखी जाएगी। अमेरिका के खिलाफ पेश इस प्रस्ताव को भारत, ब्रिटेन और फ्रांस ने अपना समर्थन दिया। चीन को इस फैसले पर जो भी आपत्तियां थीं वह भी उसने वापस ले ली थी। हालांकि अभी फैसले का आधिकारिक ऐलान होना बाकी है। पाकिस्तान पर इस फैसले का खासा असर पड़ने वाला है। यह असर पहले से ही खस्ताहाल हो चुकी पाक अर्थव्यवस्था को और खस्ता बनाने का काम करेगा।

पाक को दी गई चेतावनी
एफएटीएफ पेरिस में स्थित अंतर-सरकारी संस्था है। इस संस्था का काम गैर-कानूनी आर्थिक मदद को रोकने के लिए नियम बनाना है। इस संस्था ने पहले भी पाकिस्तान को चेतावनी दी थी कि अगर उसे इस लिस्ट में आने से बचना है तो फिर उसे आतंकियों को वित्तीय मदद देने वाली संस्थाओं के खिलाफ कार्रवाई करनी होगी। पाकिस्तान के अधिकारियों और कई राजनयिकों की मानें तो इस लिस्ट में आने के बाद पाकिस्तान की आर्थिक हालत चौपट हो जाएगी।

निवेश लाना होगी चुनौती
एफएटीएफ के इस फैसले के बाद पाकिस्तान में बिजनेस करने वाली इंटरनेशनल कंपनियां, बैंक और उसे कर्ज देने वाली कंपनियां यहां पर इनवेस्ट करने से पहले सोचेंगी। पेरिस के इस फैसले के बाद पाक के लिए विदेशी निवेश लाना टेढ़ी खीर होगा और इसका सीधा असर यहां की अर्थव्यवस्था पर देखने को मिलेगा।

बैंकों के साथ बिगड़ेंगे संबंध
ग्रे लिस्ट में आने के बाद दुनिया के उन बैंकों के साथ पाकिस्तान के संबंध बिगड़ेंगे जो पाकिस्तान को पैसे देते हैं। बैंकों को अपने लेन-देन में बड़ी रुकावट का सामना करना पड़ेगा और इसका असर सीधा संचालन पर पड़ेगा। इसकी वजह से ग्राहकों को करना पड़ेगा। यह कदम उस समय उठाया गया है अगले पांच माह के अंदर पाकिस्तान में चुनाव होने हैं। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पिछले कुछ वर्षों में पांच प्रतिशत की दर से बढ़ रही है और सरकार को उम्मीद थी कि 2018 के वित्त वर्ष में यह आंकड़ा छह तक पहुंच जाएगा। लेकिन एफएटीएफ के प्रतिबंधों के बाद पाकिस्तान का यह सपना पूरा नहीं हो पाएगा।

कपास से लेकर प्याज के निर्यात में मुश्किलें
एफएटीएफ की कार्रवाई के तहत पाकिस्तान को व्यापार में खासा नुकसान होगा। विदेश लेनदेन और विदेशी निवेश तो प्रभावित होगा ही साथ ही पाकिस्तान की तरफ से होने वाले चावल, कपास, संगमरमर, कपड़े और प्याज जैसी चीजों के निर्यात में भी उत्पादकों को तगड़ा घाटा होगा। इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड जैसी संस्थाएं भी पाकिस्तान के लोन को कुछ समय के लिए रोक देंगे। वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजार में उसके बाकी के टेंडर्स पर भी असर होगा और इससे पाक में आर्थिक संकट और बढ़ जाएगा।

चीन से भी नहीं पाएगा पैसा
एफएटीएफ में आने के बाद पाकिस्तान पर लोन डिफॉल्टर होने का खतरा बढ़ गया है। सबसे दिलचस्प बात है कि इस फैसले में चीन भी साथ है और चीन की ओर से पाकिस्तान को तगड़ा कर्ज दिया गया है। चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरीडोर (सीपीईसी) के लिए चीन बड़ी मात्रा में पाकिस्तान में रकम निवेश कर रहा है। एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट चीनी निवेश पर भी लगाम लगा सकती है। सीपीईसी के तहत चीन ने पाक में 60 बिलियन डॉलर की रकम निवेश की है और चीन का वन बेल्ट वन रोड इस प्रोजेक्ट का सबसे अहम हिस्सा है।












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