पाकिस्‍तान में ड्रोन हमलों में 60 की मौत

ड्रोन हमलों में 60 की मौत
हफ़ीज़ चाचड़

बीबीसी हिंदी संवाददाता, इस्लामाबाद

अमरीका इन ड्रोन हमलों की सीधी ज़िम्मेदारी स्वीकार नहीं करता. पाकिस्तान में अधिकारियों का कहना है कि पाकिस्तान के क़बायली इलाक़े ख़ैबर एजेंसी में पिछले 24 घंटों में हुए कई ड्रोन हमलों में कम से कम 60 लोगों की मौत हो गई है. उनका कहना है कि अमरीकी चालक रहित विमान यानी ड्रोन से हुए इन हमलों में मारे गए लोग या तो पाकिस्तानी तालिबान के संदिग्ध सदस्य हैं या फिर उनका समर्थन करने वाले चरमपंथी.

हालांकि इसकी पुष्टि नहीं की जा सकी है. पाकिस्तान में बीबीसी के एक संवाददाता का कहना है कि ऐसा प्रतीत होता है कि अमरीका ड्रोन हमलों का दायरा पाकिस्तान के दूसरे इलाक़ों में बढ़ा रहा है. हाल ही में उनके हमलों का केंद्र उत्तरी वज़ीरिस्तान रहा है.

राष्ट्रपति बराक़ ओबामा के कार्यकाल में ड्रोन हमलों में बढ़ोत्तरी हुई है और अब हफ़्ते में कई बार ये हमले किए जा रहे हैं. शुक्रवार को पहला हमला तिराह घाटी में स्थानीय समय के अनुसार सुबह आठ बजे किया गया. पाकिस्तानी सुरक्षा अधिकारियों ने बीबीसी को बताया कि संदाना इलाक़े में हुए इस हमले का निशाना दो वाहन थे. इस हमले में सात संदिग्ध पाकिस्तानी तालिबान चरमपंथी मारे गए और 11 अन्य घायल हो गए.

अधिकारियों का कहना है कि ये चरमपंथी ख़ैबर इलाक़े के बाहर से यहाँ आए हुए थे. इसके कुछ मिनटों बाद ही स्पीन द्रांग इलाक़े में एक परिसर पर ड्रोन हमला हुआ जहाँ लश्कर-ए-इस्लाम के तालिबान समर्थक चरमपंथी एक बैठक कर रहे थे. अधिकारियों का कहना है कि इस हमले में गुट से वरिष्ठ सदस्यों सहित 32 लोगों की मौत हो गई.

लश्कर-ए-इस्लाम वह गुट है जो इस इलाक़े में सख़्त शरिया क़ानून को लागू करने के प्रयासों में लगा हुआ है. इसी गुट के कुछ सदस्य सीमापार अफ़ग़ानिस्तान में नैटो की फ़ौजों से भी लड़ रहे हैं.

अधिकारियों का कहना है कि तीसरा हमला दोपहर बाद नराई बाबा के इलाक़े में हुआ. एक अधिकारी ने बीबीसी को बताया, "एक परिसर पर हुए हमले में कम से कम 11 चरमपंथी मारे गए. ये सभी स्वात के इलाक़े से थे और वहाँ चल रहे चरमपंथी विरोधी कार्रवाइयों की वजह से यहाँ आकर छिपे हुए थे."

इससे पहले गुरुवार को एक परिसर पर ड्रोन के ज़रिए किए गए कई ड्रोन हमलों में कम से कम सात चरमपंथी मारे गए थे. ये सभी तालिबान नेता हाफ़िज़ गुल बहादुर के वफ़ादार बताए गए हैं.

कराची में बीबीसी के संवाददाता सैयद शोएब हसन का कहना है कि ख़ैबर के इलाक़े में आमतौर पर ड्रोन हमले नहीं होते थे क्योंकि यह चरमपंथियों का गढ़ नहीं माना जाता. आमतौर पर वज़ीरिस्तान को तालिबान और अल-क़ायदा के चरमपंथियों का इलाक़ा माना जाता रहा है. इस बीच अमरीका ने अपनी ख़ुफ़िया एजेंसी सीआईए के एक शीर्ष जासूस को पाकिस्तान से हटा लिया है.

अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसी ने इस ख़बर की पुष्टि की है और कहा है कि उनकी जान को ख़तरे की वजह से उन्हें हटाने का फ़ैसला किया गया है. इस्लामाबाद में तैनात इस अधिकारी को हाल ही में अदालत में दायर एक याचिका में ड्रोन हमलों के लिए ज़िम्मेदार ठहराया गया था.

इस याचिका पर मीडिया में दी गई ख़बरों में इस अधिकारी का नाम प्रमुखता से प्रकाशित किया गया था. इसके बाद इस्लामाबाद में ड्रोन हमलों के ख़िलाफ़ हो रहे प्रदर्शन में लोगों ने हाथ में इस अधिकारी के नाम की तख़्ती लेकर विरोध व्यक्त किया था. उल्लेखनीय है कि वर्ष 2010 में अब तक पाकिस्तान के क़बायली इलाक़ों में सौ से अधिक ड्रोन हमले हो चुके हैं. इनमें से ज़्यादातर हमला उत्तरी वज़ीरिस्तान में हुआ है.

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