दतिया में अब शिवसेना की टिकट पर चुनाव लड़ेंगे नरोत्तम मिश्रा? ऑफर का क्या होगा? कांग्रेस ने भी चला बड़ा कार्ड

Datia Bypoll 2026 (Narottam Mishra Shiv Sena UBT): मध्य प्रदेश की राजनीति में इस समय दतिया विधानसभा सीट पर होने जा रहा उपचुनाव टॉक ऑफ द टाउन बन चुका है। बीजेपी की तरफ से नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर आशुतोष तिवारी को मैदान में उतारने के बाद से ही यहां सियासी घमासान मचा हुआ है। इसी हंगामे के बीच दो ऐसी बड़ी घटनाएं हुईं जिसने पूरे चुनाव का रुख ही पलट कर रख दिया है।

पहली बड़ी खबर यह है कि कांग्रेस ने इस हॉट सीट से दतिया राजघराने से ताल्लुक रखने वाले कद्दावर नेता घनश्याम सिंह को अपना आधिकारिक उम्मीदवार बना दिया है। वहीं दूसरी और सबसे चौंकाने वाली एंट्री महाराष्ट्र से हुई है, जहां उद्धव ठाकरे की पार्टी शिवसेना (UBT) ने नरोत्तम मिश्रा को दतिया से चुनाव लड़ने का खुला न्योता देकर सबको हैरान कर दिया है।

Narottam Mishra

उद्धव ठाकरे की पार्टी ने नरोत्तम मिश्रा को क्या ऑफर दिया?

बीजेपी के भीतर जारी असंतोष के बीच शिवसेना (UBT) ने बड़ा राजनीतिक दांव खेला। पार्टी के मध्य प्रदेश प्रमुख सुनील शर्मा ने कहा कि नेतृत्व से चर्चा के बाद नरोत्तम मिश्रा को शिवसेना (UBT) के टिकट पर चुनाव लड़ने का प्रस्ताव दिया गया है।

शिवसेना (UBT) के मध्य प्रदेश प्रमुख सुनील शर्मा ने साफ किया है कि उन्होंने अपनी आलाकमान से हरी झंडी मिलने के बाद नरोत्तम मिश्रा को पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ने का ऑफर भेजा है। सुनील शर्मा का कहना है कि अगर नरोत्तम मिश्रा इस ऑफर को स्वीकार करते हैं, तो खुद पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे जैसे बड़े नेता मध्य प्रदेश आकर उनके समर्थन में प्रचार करेंगे।

उन्होंने राज्य के आईटी सेल प्रमुख नहार सिंह गौर को इस खुले निमंत्रण का वीडियो मैसेज सोशल मीडिया पर वायरल करने की जिम्मेदारी भी सौंप दी है। फिलहाल नरोत्तम मिश्रा की ओर से इस प्रस्ताव पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

कौन हैं आशुतोष तिवारी? नरोत्तम मिश्रा की जगह BJP ने दिया दतिया सीट से टिकट,अब हो रहा भारी विरोध
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बीजेपी में टिकट को लेकर क्यों मचा बवाल?

बीजेपी की ओर से आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद दतिया में नरोत्तम मिश्रा समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। कई जगह प्रदर्शन हुए, नेशनल हाईवे जाम किया गया, बाजार बंद कराए गए और स्थानीय बीजेपी कार्यालय में ताला लगाने की भी खबर सामने आई। विरोध के दौरान हिंसा के आरोप भी लगे, जिसमें कुछ पुलिसकर्मी घायल हुए।

हालांकि प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने साफ कहा कि पार्टी का फैसला अंतिम है। उन्होंने कहा कि कुछ कार्यकर्ताओं के इस्तीफे की जानकारी मिली है, लेकिन किसी का इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया है। पार्टी नेतृत्व चाहता है कि सभी कार्यकर्ता चुनाव में सक्रिय रहें। उन्होंने यह भी कहा कि नरोत्तम मिश्रा पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं और उनके मार्गदर्शन में बीजेपी दतिया उपचुनाव बड़े अंतर से जीतेगी।

हेमंत खंडेलवाल ने कहा, "BJP ने आशुतोष तिवारी को चुनाव के लिए अपना ऑफिशियल कैंडिडेट घोषित किया है। मुझे पता चला है कि पार्टी के कुछ वर्कर्स ने अपना इस्तीफा दे दिया है। हालांकि मुझे कोई इस्तीफा नहीं मिला है, लेकिन हमारी पार्टी लीडरशिप ने तय किया है कि सभी पार्टी वर्कर्स अपने काम में लगे रहें। इसलिए हमने कोई इस्तीफा स्वीकार नहीं किया है। नरोत्तम मिश्रा हमारे सीनियर लीडर हैं, उनके गाइडेंस में, हम दतिया चुनाव लड़ेंगे और बड़ी जीत हासिल करेंगे।"

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दतिया राजघराने के 'राजा' पर कांग्रेस का भरोसा

बीजेपी के अंदर मचे इस घमासान के बीच विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने बिल्कुल भी देरी नहीं की और दतिया के पूर्व जिला अध्यक्ष 72 वर्षीय घनश्याम सिंह को मैदान में उतार दिया। घनश्याम सिंह का दतिया राजघराने से पुराना नाता है और वे तीन बार के विधायक हैं। उनके पिता महाराज कृष्ण सिंह जू देव साल 1984 में कांग्रेस के टिकट पर भिंड-दतिया लोकसभा सीट से सांसद रह चुके हैं।

टिकट मिलने के बाद कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने जीत का भरोसा जताते हुए कहा, "मैं यह उपचुनाव हर हाल में जीतने जा रहा हूं। मेरा पूरा ध्यान दतिया के विकास पर होगा और इलाके में फैली बदले की भावना वाली राजनीति और जातिवाद के जहर को खत्म करना मेरी सबसे पहली प्राथमिकता होगी।"

दतिया का चुनावी इतिहास: जब आमने-सामने आए थे नरोत्तम और घनश्याम

घनश्याम सिंह का दतिया और सेवढ़ा सीट पर लंबा राजनीतिक इतिहास रहा है। उन्होंने पहली बार साल 1993 में बीजेपी के शंभू दयाल तिवारी को हराकर दतिया सीट पर कब्जा जमाया था। इसके बाद साल 2003 में अवधेश नायक को पटखनी देकर वे दोबारा विधानसभा पहुंचे।

हालांकि साल 2008 के विधानसभा चुनाव में उनका सामना नरोत्तम मिश्रा से हुआ, जहां मिश्रा ने उन्हें हरा दिया था। इसके बाद घनश्याम सिंह ने साल 2013 में सेवढ़ा से भाग्य आजमाया पर नाकामी मिली, लेकिन साल 2018 में उन्होंने सेवढ़ा सीट जीतकर शानदार वापसी की। हालांकि साल 2023 के पिछले चुनाव में वे बीजेपी के प्रदीप अग्रवाल के हाथों हार गए थे।

क्यों हो रहा है दतिया में समय से पहले चुनाव?

दतिया उपचुनाव इसलिए कराना पड़ रहा है क्योंकि साल 2023 के मुख्य विधानसभा चुनाव में नरोत्तम मिश्रा को हराने वाले कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को कोर्ट ने बड़ा झटका दिया था। भारती को धोखाधड़ी के एक पुराने मामले में दोषी पाते हुए तीन साल की जेल की सजा सुनाई गई थी, जिसके तुरंत बाद नियमों के तहत उन्हें विधायक पद के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया।

अब इस खाली हुई सीट को भरने के लिए चुनाव आयोग ने तारीखों का ऐलान कर दिया है। दतिया विधानसभा सीट पर आगामी 30 जुलाई को वोट डाले जाएंगे और वोटों की गिनती 3 अगस्त को होगी। अब देखना दिलचस्प होगा कि नरोत्तम मिश्रा उद्धव ठाकरे के इस तीर को थामकर बीजेपी के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंकते हैं या चुपचाप पार्टी के फैसले के साथ बने रहते हैं।

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