सुपरटेक प्रोजेक्ट्स की CBI जांच का आदेश, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- ‘बिल्डर-बैंक गठजोड़' का पर्दाफाश जरूरी
Supertech Projects Noida: सुप्रीम कोर्ट ने रियल एस्टेट कंपनी सुपरटेक लिमिटेड के एनसीआर स्थित प्रोजेक्ट्स में कथित घोटालों को लेकर केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को प्रारंभिक जांच (Preliminary Inquiry) शुरू करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने बिल्डरों और बैंकों के बीच "गठजोड़" की ओर इशारा करते हुए इसे हजारों खरीदारों के साथ धोखाधड़ी बताया।
जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने सीबीआई द्वारा दाखिल एक हलफनामे पर गौर करने के बाद उत्तर प्रदेश और हरियाणा के पुलिस महानिदेशकों को निर्देश दिया कि वे एक विशेष जांच दल (SIT) के गठन के लिए डीएसपी, इंस्पेक्टर और कांस्टेबलों की सूची जल्द से जल्द एजेंसी को सौंपें।

साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी, नोएडा अथॉरिटी, केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय, भारतीय चार्टर्ड अकाउंटेंट्स संस्थान (ICAI) और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने विभागों के वरिष्ठतम अधिकारियों में से एक नोडल अधिकारी नामित करें, जो SIT को हर संभव सहायता दें।
कोर्ट ने यह भी दोहराया कि हजारों घर खरीदार सबवेंशन योजना (Subvention Scheme) का शिकार हुए हैं, जिसमें बैंक निर्माणाधीन परियोजनाओं के लिए बिल्डरों को 60 से 70 प्रतिशत तक लोन की राशि अग्रिम दे देते थे, जबकि प्रोजेक्ट तय समय पर पूरे नहीं हुए। इसके बावजूद खरीदारों को ईएमआई चुकाने के लिए मजबूर किया गया।
पूरे मामले के महत्वपूर्ण बिंदु
- सुपरटेक के प्रोजेक्ट्स की सीबीआई जांच का आदेश
- बिल्डर और बैंक के बीच कथित 'गठजोड़' का संज्ञान
- SIT में राज्यों के पुलिस अधिकारियों की नियुक्ति का निर्देश
- RBI, ICAI और अन्य निकायों को सहयोग के लिए नोडल अधिकारी तय करने का निर्देश
- हजारों घर खरीदारों से धोखाधड़ी का आरोप
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई से पूछा कि वह इस "बिल्डर-बैंक गठजोड़" की परतें कैसे खोलेगी, और एक स्पष्ट रोडमैप दाखिल करने को कहा। कोर्ट में लंबित याचिकाएं उन घर खरीदारों ने दायर की थीं, जिन्होंने नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गुरुग्राम जैसे क्षेत्रों में सबवेंशन योजना के तहत फ्लैट बुक किए थे।
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