ग्रेटर नोएडा: ना डॉक्टर, ना ऑक्सीजन ना क्लीनिक, पेड़ के नीचे यूं इलाज करवा रहे ग्रामीण
नोएडा, मई 18: ग्रेटर नोएडा के मेवला गोपालगढ़ गांव में खुले आसमान के नीचे कोविड मरीजों का इलाज किया जा रहा है। नीम के पेड़ की टहनियों से बांधकर ड्रिप लगाई जा रही है। एक, दो नहीं बल्कि यहां दर्जनों लोग बीमार पड़े हैं और इसी तरह अपना इलाज करवा रहे हैं। गांव की जो तस्वीरें सामने आई हैं उनमें चारों ओर गायें चारा चरती हुई दिख जाएंगी, जमीन पर सीरिंज और दवा के खाली पैकेट भी पड़े दिख रहे हैं। दरअसल, गांव में कोई डॉक्टर या स्वास्थ्य सुविधा नहीं है। पास में एक सरकारी अस्पताल है, लेकिन इसमें बेड उपलब्ध नहीं हैं और ग्रामीणों का कहना है कि वे प्राइवेट अस्पताल या क्लीनिक का खर्च नहीं उठा सकते।

पेड़ के नीचे खाट पर लेटकर करवा रहे इलाज
67 वर्षीय हरदीप सिंह कोरोना वायरस से संक्रमित हैं। उनके फेफड़ो में इंफेक्शन है। हरदीप सिंह गांव में ही पेड़ के नीचे खाट पर इलाज करवा रहे हैं। उनका कहना है कि अस्पताल में हालत और भी खराब है। यहां उन्हें ठीक लगता है। बुखार से पीड़ित 55 वर्षीय चंद्रावती को सांस लेने में तकलीफ हुई तो बेटे दिनेश ने घर में ही ऑक्सीजन सिलेंडर की व्यवस्था कर दी। दिनेश ने कहा कि गांव में कोई डॉक्टर आने को तैयार नहीं है। अस्पताल में भर्ती नहीं कर सकते, फिर किसी से पूछकर काम चला रहे हैं। मां की हालत भी ठीक हो रही है। दिनेश का कहना है कि गांव में शायद ही कोई ऐसा घर होगा, जहां कोरोना जैसे लक्षण वाले मरीज ना दिखें।

'ऑक्सीजन लेवल बढ़ाने के लिए नीम के पेड़ के नीचे जाना पड़ता है'
कुछ लोगों का मानना है कि नीम का पेड़, जो अपने औषधीय गुणों के लिए जाना जाता है, वह उनका ऑक्सीजन लेवल बढ़ाएगा। गांव में रहने वाले संजय सिंह ने बताया कि उनके 74 वर्षीय पिता की बुखार के बाद दो दिन में ही मृत्यु हो गई थी। उनके पिता का कोविड टेस्ट नहीं किया गया था। सिंह ने कहा, "जब लोगों की सांस फूलती है तो, उन्हें अपना ऑक्सीजन लेवल बढ़ाने के लिए पेड़ों के नीचे जाना पड़ता है।" उन्होंने कहा कि लोग मर रहे हैं और हमारी देखभाल करने वाला कोई नहीं है। ग्राम प्रधान योगेश तालान ने कहा कि स्वास्थ विभाग की टीम यहां पहुंची ही नहीं। सब राम भरोसे पड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि झोलाछाप डॉक्टर का ही बस आसरा है।

हाईकोर्ट ने की टिप्पणी- सूबे की स्वास्थ्य व्यवस्था राम भरोसे चल रही है
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश के छोटे शहरों, कस्बों और ग्रामीण इलाकों में कोरोना का संक्रमण तेजी से बढ़ने और मरीजों के इलाज में हो रही लापरवाही पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि सूबे की स्वास्थ्य व्यवस्था राम भरोसे चल रही है। इसमें तत्काल सुधार की आवश्यकता है। कोर्ट ने मेरठ मेडिकल कॉलेज में भर्ती कोविड मरीज संतोष कुमार के लापता होने में डाक्टरों और मेडिकल स्टॉफ की लापरवाही को गंभीर मानते हुए अपर मुख्य सचिव चिकित्सा व स्वास्थ्य को जिम्मेदारी तय करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने प्रदेश सरकार को चार महीने में प्रदेश के अस्पतालों में चिकित्सकीय ढांचा सुधारने और पांच मेडिकल कॉलेजों को एसजीपीजीआई स्तर का संस्थान बनाने के लिए कदम उठाने का निर्देश दिया है।












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