तीसरा मोर्चा कभी विकल्‍प नहीं बन सकता है: अरूण जेटली

Third front is not an option for power: Arun Jaitley
नई दिल्‍ली। राज्‍यसभा के नेता प्रतिपक्ष अरूण जेटली का कहना है कि तीसरे मोर्चे की पार्टियों की विचारधारा में कोई एकरूपता नहीं है, साथ न ही इसके संभावित दलों की राजनीतिक स्थिति मजबूत नहीं है, ऐसे में इसे स्थिरता भी नहीं मिल सकती है। अत: यह सत्‍ता का विकल्‍प कभी नहीं बन सकता है। अरूण के अनुसार तीसरे मोर्चे की पार्टियों का ज्‍यादा प्रभाव नहीं है, अत: इससे नरेंद्र मोदी को ही फायदा होगा। बड़े राज्‍यों वाले दल सपा और जदयू गंभीर संकट से जूझ रहे हैं।

जेटली का कहना है कि तीसरे मोर्चे की आवश्‍यक अपेक्षा यह है कि ये दल कांग्रेस और भाजपा से दूर हो। जबकि सच तो यह है कि सपा की मदद से पिछले दस सालों से केंद्र में सरकार रही है, वहीं जदयू का लंबे समय तक भाजपा से गठबंधन रहा है। तीसरे मोर्चे के संभावित दलों में भारी विरोधाभास है, जिसका कोई हल नहीं है।

गौर हो कि तीसरा मोर्चा बनने की स्थिति में सपा, बसपा, वामदल, तृणमूल कांग्रेस, एआईडीएमके, डीएमके, आरजेडी और जेडीयू को साथ आना होगा, जिनके बीच भारी विरोधाभास हैं। इसके अलावा चुनाव पूर्व सर्वे में भी तृणमूल कांग्रेस और एआईडीएमके को ही अच्‍छी सीटें मिलते हुए दिखाया जा रहा है, बा‍की दलों की स्थिति कुछ खास नहीं होगी।

हर मौके पर नरेंद्र मोदी का बचाव करने वाले अरूण जेटली का कहना है कि तीसरे मोर्चे की संभावना को सपा और जेडीयू ही बढ़ावा दे रहे हैं, जबकि इन दोनों ही दलों की स्थिति अपने राज्‍यों में अच्‍छी नहीं है। ऐसे में तीसरे मोर्चे की संभावना से नरेंद्र मोदी को ही लाभ मिलेगा।

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