आंखे, दिल व किडनी दान करना चाहता है निठारी का नरपिशाच सुरिंदर कोली
नई दिल्ली| सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को निठारी हत्याकांड मामले में मृत्युदंड का सामना कर रहे सुरिंदर कोली की एक याचिका खारिज कर दी। अब कोली की फांसी लगभग तय है। कोली ने अपनी याचिका में रिम्बा हलदर हत्याकांड में मिले मृत्युदंड को बरकरार रखने वाले सर्वोच्च न्यायालय के फैसले को वापस लेने की अपील की थी। दूसरी तरफ डासना जेल में बंद कोली ने न्यायालय का फैसला सुनने के बाद अंगदानकी इच्छा व्यक्त की है। उसने अपनी आंखे दिल और किडनी दान करने की इच्छा जताई है। इस संबंध में उसने जेल अधीक्षक को खत भेजा है।

प्रधान न्यायमूर्ति एच. एल. दत्तू, न्यायमूर्ति अनिल आर. दवे और न्यायमूर्ति एस. ए. बोबडे की पीठ ने मृत्युदंड पर दायर पुनर्विचार याचिका पर पहली बार खुली अदालत में हुई सुनवाई में कहा-'हम इस बात से पूरी तरह संतुष्ट हैं कि इस न्यायालय ने कोई गलती नहीं की है, जिसके लिए हमें उस आदेश पर पुनर्विचार करना पड़े। वरिष्ठ वकील राम जेठमलानी के उस तर्क जिसमें उन्होंने कहा कि कोली को अपने बचाव के लिए पर्याप्त कानूनी सहायता नहीं दी गईए के संदर्भ में न्यायालय ने निचली अदालत को निर्देश दिया कि आगे से अन्य मामलों में आरोपी को विशेषज्ञता प्राप्त वकील मुहैया कराया जाए जो आरोपी के मामले को पर्याप्त समय दे सके।
कोली को पहले 7-12 सितंबर के बीच फांसी पर लटकाया जाना था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने छह सितंबर की आधी रात एक आदेश जारी कर उसकी मौत पर रोक लगा दी थी। इसके बाद पुनर्विचार याचिका दायर की गई थी। उस पर सुनवाई के लिए 28 अक्टू बर का वक्त तय किया गया था और 29 अक्टूकबर तक के लिए फांसी पर रोक लगाई गई थी। मेरठ जेल के वरिष्ठ जेल अधीक्षक का कहना है कि जेल का फांसी घर इस समय पूरी तरह तैयार है।
सुरेंद्र कोली को यदि फांसी देने के लिए फिर से यहां लाया जाता है तो जेल प्रशासन फांसी की कार्रवाई को नियमानुसार समय से अंजाम दे देगा।












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