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कार का शीशा टूटने पर राखी बिड़ला ने जो किया सही किया

Rakhi Birla
नई दिल्ली। दिल्ली की महिला एवं बाल विकास कल्याण मंत्री राखी बिड़ला की कार पर जब अचानक एक चीज आकर टकरायी और शीशा टूट गया, तो पूरे शहर में खबर फैल गई कि राखी की कार पर हमला हुआ है। मामला पुलिस थाने तक पहुंचा और बाद में पता चला कि कार का शीशा बच्चे की क्रिकेट बॉल से टूटा था। खैर मामला तो यहां खत्म हो गया, लेकिन विपक्षी दलों में चर्चाओं का बाजार अब भी गर्म है।

भारतीय जनता पार्टी के एक नेता स्थानीय नेताओं ने कहा कि यह राखी का स्टंट है, ताकि बिन मांगे उन्हें सुरक्षा मिल जाये, तो कईयों ने कहा कि राखी ने हाल ही में अपनी इनोवा गाड़ी खरीदी, लेकिन चूंकि वो जनता से ऑटो में चलने का वादा कर चुकी हैं, इसलिये मजबूरन उन्हें खुद पर हमला करवाना पड़ा, ताकि लोगों से यह कह सकें कि इनोवा में चलना उनकी मजबूरी है। खैर ऐसी तमाम बातें सामने आयीं, जिन्हें मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने हंस कर डाल दिया। वो इसलिये क्योंकि केजरीवाल जानते हैं, कि राखी ने उस समय जो किया सही किया।

अगर वाक्ये को ध्यान से देखें तो जिस समय राखी की कार का शीशा टूटा, उस समय न तो बच्चा सामने आया और न ही उसके माता-पिता। ऐसा इसलिये क्योंकि वे उसी माहौल में जी रहे हैं, जहां पर विधायक-सांसदों के काफिले पर परिंदा भी पर मार दे, तो उसे पकड़कर पिंजड़े में बंद कर दिया जाता है। जिस समय विधायक राखी की गाड़ी का शीशा टूटा, उस समय माता-पिता इसीलिये डर गये, कि कहीं उन्हें सलाखों के पीछे न डाल दिया जाये।

रही बात राखी की, तो राखी ने पुलिस को सिर्फ इतनी सूचना दी कि उनके वाहन पर कोई ठोस चीज आकर गिरी और शीशा टूट गया, कृपया इसे जांच के लिये संज्ञान में लें। चूंकि पुलिस का काम ही है टेढ़ी नजर से मामले को देखना, इसलिये पुलिस ने जो एफआईआर लिखी, उसमें यह लिखा कि राखी के वाहन पर हमला हुआ। और मीडिया को उसी एफआईआर की कॉपी मिल गई और तिल का ताड़ बन गया। रही बात मीडिया की तो उसे राखी ने नहीं बल्कि पुलिस ने बुलाया था।

खैर बच्चे के माता-पिता ने माफी मांग ली और मामला बंद हो गया, लेकिन इस घटना ने एक गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है। वो यह कि अगर बच्चे की बॉल की जगह कोई हथगोला या कोई घातक तत्व होता, तो क्या होता। जिस तरह केजरीवाल भ्रष्टाचार के ख‍िलाफ जंग में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, उससे तो यही लगता है कि उन्हें और उनके साथ‍ियों को सुरक्षा की सख्त जरूरत है। भले ही काफिला छोटा हो, लेकिन सुरक्षा में समझौता नहीं किया जाना चाहिये, क्योंकि जिस दिन केजरीवाल या उनके साथी विधायक फाइलें खोलना शुरू करेंगे उस दिन दिल्ली के कई माफिया भी कठघरे में खड़े दिखाई देंगे।

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