दिल्ली में कूड़े के ढेर में मिली बच्‍ची हुई स्‍वस्‍थ,अस्‍पताल से किया गया डिस्‍चार्ज

दिल्ली में कूड़े के ढेर में मिली बच्‍ची हुई स्‍वस्‍थ,अस्‍पताल से किया गया डिस्‍चार्ज

Delhi Newborn Girl Rescued From Garbage:जाको राखे साइंया मार सके ना कोए। देश की राजधानी दिल्‍ली में एक नवजात बच्ची की भी ऐसे ही ईश्‍वर ने रक्षा की है। अक्‍टूबर माह की शुरूआत में जिस बच्‍ची को वसंत कुंज इलाके में उसके अपने ही कचरे के ढेर में मरने के लिए छोड़ गए थे, वो अस्‍पताल से डिस्‍चार्ज हो चुकी है। डॉक्‍टरों के अनुसार अब नवजात बिल्‍कुल स्‍वस्‍थ है।अस्पताल से छुट्टी के बाद उसे दिल्ली बाल कल्याण परिषद के प्रतिनिधियों को सौंप दिया गया है।

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बच्ची को दिल्ली पुलिस ने इलाज के लिए भर्ती करवा था

बता दें अक्‍टूबर माह की शुरूआत में एक नवजात बच्‍ची दिल्‍ली वसंत विहार में कूड़े के ढेर में मिली थी। 8 अक्टूबर को रजोकरी गांव की हरिजन बस्ती में कूड़े के ढेर में लावारिस मिली नजवात बच्ची को दिल्ली पुलिस इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया था। जहां 11 दिन तक इलाज के बाद उसे अब डिस्‍चार्ज कर दिया है। डॉक्‍टरों के अनुसार बच्‍ची अच्‍छी तरह से दूध पी रही और उसका वजन भी बढ़ रहा है।

सीडब्लूसी को सौंपी गई बच्‍ची

फोर्टिस अस्पताल, वसंत कुंज की मेडिकल टीम ने 18 अक्टूबर को उसे छुट्टी दे दी और दिल्ली पुलिस टीम की मौजूदगी में दिल्ली काउंसिल फॉर चाइल्ड वेलफेयर (DCCW), चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC) नई दिल्ली के प्रतिनिधियों को सौंपा गया।

कूड़े के ढ्रेर में किसी जानवर ने भी काट लिया था

अस्‍पताल प्रशासन ने बताया कि विगज 8 अक्टूबर को नवजात बच्ची को स्थानीय पुलिस ने उनके अस्‍पताल में इमरर्जेंसी में भर्ती करवाया था। जब पुलिस को वो बच्‍ची कूड़ेदान में मिली थी तब उसका वजन लगभग 2.1 किलोग्राम था और वह हाइपोथर्मिक थी। उसके दाहिने पैर के पास एक जानवर के काटने का निशान था, और ऑक्सीजन भी कम था। इसके अलावा, बच्चे को पीलिया और सांस लेने में तकलीफ थी।

फोर्टिस अस्‍पताल के एक्‍पर्ट डॉक्‍टर ने किया इलाज

बच्‍ची का इलाज डॉ एमडी नदीम, एचओडी-इमरजेंसी और डॉ राहुल नागपाल की देखरेख में डॉक्टरों की एक टीम ने किया बाद में निदेशक और एचओडी, बाल रोग, फोर्टिस अस्पताल, वसंत कुंज ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए ये केस अपने अंडर में लिया और उसका इलाज किया।

बच्‍ची का शरीर नीला पड़ गया था

बता दें ये नवजात बच्ची जहां मिली उस जगह से गुजर रहे दो लोगों ने देखा था जिसने पुलिस को सूचना दी। उसे नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट (एनआईसीयू) में रखा गया था। शुरूआती जांच में खुलासा हुआ था कि बच्‍ची का जन्‍म मिलने के 24-48 घंटे से कम समय पहले ही हुआ था, ठंड में पड़े होने के कारण उसका शरीर नीला पड़ गया था वजह केवल दो किलोग्राम था, जो नवजात शिशु के सामान्य वजन से कम था।

दिल्‍ली में छोड़े गए शिशुओं की संख्‍या देश में सबसे अधिक है

बता दें सरकारी की तमाम सख्‍ती और कानून होने के बावजूद भारत में यूनिसेफ के अनुसार 29.6 मिलियन अनाथ और त्यागे हुए बच्चे हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो 2020 की रिपोर्ट के अनुसार 2015-2020 के बीच भारत के किसी भी शहर में छोड़े गए शिशुओं की सबसे अधिक संख्या वाले राज्यों में दिल्ली नंबर वन पर है। वहीं अन्‍य राज्यों में, महाराष्ट्र, राजस्थान, कर्नाटक और गुजरात में भी शिशुओं, भ्रूण हत्या और शिशु हत्याओं के बड़ी संख्‍या में केस हैं।

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