राहुल गांधी पर भी दिख रहा है 'मोदी इफेक्ट'

यह ध्यान देने योग्य है कि आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर दिल्ली में कांग्रेस की एआईसीसी की बैठक हुई वहीं भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक भी तीन दिनों तक चली। एआईसीसी मीट में राहुल ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं में जोश भरने का काम किया तो मोदी ने जनता के सामने देश के विकास का एजेंडा रखा। जिसके बाद से ही माना जा रहा है कि लोकसभा के लिए अभियान की शुरूआत हो गयी है। मोदी पहले से ही देश भर में रैलियां आयोजित कर रहे हैं, जबकि राहुल ने अभी तक चार राज्यों के विधानसभा चुनाव के लिए ही प्रचार किया है।
देश भर में आयोजित रैलियों में मोदी को बेहतर समर्थन मिल रहा है, जबकि विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान दिल्ली में राहुल की रैलियों से लोग उठकर चले गये थे, जिसके बाद राहुल को अपना भाषण छोटा करना पड़ा। एआईसीसी में दिये गये भाषण और उसके बाद उन्होने वार्ता में मजाकिया जुमलों का भी प्रयोग किया। एआईसीसी में उन्होने भाजपा पर तंज कसते हुए कहा था कि इन लोगों की मार्केटिंग इतनी अच्छी है कि ये लोग गंजों को भी कंघी बेंच सकते हैं, वहीं कल उन्होने कांग्रेस नेताओं से मुलाकात में विधानसभा चुनाव में हार पर कहा कि 'घोड़े दो तरह के होते हैं, एक वो जो रेस में दौड़ते हैं और दूसरे वो जो शादी में दूल्हे को ले जाते हैं। हमसे गलती हो गयी और हमने शादी वाले दूल्हों को रेस में उतार दिया लेकिन लोकसभा चुनाव में ऐसा नहीं होगा।
कहा जा रहा है कि मोदी की तरह राहुल भी अपने भाषणों को रोचक बनाने के लिए ऐसे जुमलों का प्रयोग कर रहे हैं, विधानसभा चुनाव में वह 'आधी रोटी खाएंगे और कांग्रेस को लाएंगे जैसे जुमले प्रयोग करते रहे हैं, जिनका प्रभाव उनकी सरकार के खिलाफ ही दिखा। वहीं मोदी ने अपनी रैलियों के भाषण में रोचकता, तथ्य और घटनाक्रमों के वर्णन का बेहतर समावेश कर रहे हैं, साथ ही उनकी बोलने की शैली भी स्रोताओं को प्रभावित कर रही है। कहा जा सकता है कि राहुल पर भी 'मोदी इफेक्ट' दिखाई दे रहा है।












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