शराब पर पाबंदी लगाकर करें 'समलैंगिकता' का इलाज: विहिप

गौर हो कि सुप्रीम कोर्ट ने दिये गये हालिया निर्णय में समलैगिकता को गैरकानूनी करार दिया था और साथ ही कानून में सुधार के लिए संसद में प्रस्ताव पारित करने की बात कही थी। चार साल पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने समलैगिकता को कानून के दायरे में ही रखने का निर्णय दिया था जिसे बाद में सुप्रीम कोर्ट ने गैरकानूनी करार दे दिया। सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय का देश में विरोध हो रहा है वहीं इसके खिलाफ आवाज उठाने के लिए समलैगिक समुदाय के लोग प्रदर्शन कर रहे हैं, उनका कहना है कि उन्हें समाज में उपेक्षा का सामना करना पड़ता है।
जहां सुप्रीम कोर्ट ने समलैगिकता को अप्राकृतिक करार देते हुए नकार दिया, वहीं मुख्य विपक्षी दल भाजपा ने भी सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का स्वागत किया है।
आज नई दिल्ली में विहिप कार्यकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय की सराहना की और प्रदर्शन कर कहा कि 'यह एक बीमारी है और इसका इलाज नैतिक शिक्षा को बढ़ावा देकर और शराब पर पूर्ण प्रतिबंध लगाकर किया जाना चाहिए।












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